सौर मण्डल

हैलो! दोस्तों मेरा नाम राघवेन्द्र है और आप पढ़ रहे हैं “Mysterious universe”.

मनुष्य हमेशा से ही चाँद, तारों तथा दूसरी दुनिया की कल्पना करता रहा है तथा प्राचीन काल से ही मनुष्य ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझने का प्रयास करता रहा है। इस ब्रह्माण्ड में अरबों – खरबों तारे , ग्रह और उपग्रह मौजूद हैं। इन सब तारों , ग्रहों और उपग्रहों के बारे में जानना तो वैज्ञानिकों के लिए भी असम्भव है , परंतु हम अपने सौर मण्डल के बारे में काफी कुछ जान चुके हैं।

इस ब्रह्माण्ड में बैसे तो कई आकाश गंगाये तथा इन आकाश गंगाओं में कई सौर मण्डल मौजूद हैं परंतु हम हमेशा से ही अपने सौर मण्डल के रहस्यों जानने में रुचिकर हैं । तो आइये इस आर्टिकल में हम अपने सौर मण्डल की सैर करते हैं।

सौर मण्डल संक्षिप्त में(Solar system in brief)

हमारा सौर मण्डल लगभग 4.2 अरब वर्षों पहले अस्तित्व में आया।हमारे सौर मण्डल में एक तारा अर्थात सूर्य , आठ ग्रह ,166 ज्ञात उपग्रह , 5 बौने ग्रह तथा अरबो की संख्या में क्षुद्र ग्रह ,धूम्रकेतु व उल्कायें सम्मिलित है हमारा तारा सूर्य हमारी आकाशगंगा के केन्द्र अर्थात सुपर मैसिव ब्लाक होल की परिक्रमा करता है। हमारे सौर मण्डल के सारे ग्रह हमारे तारे अर्थात सूर्य की परिक्रमा करते हैं तथा सभी उपग्रह अपने अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं।

आईये अब हम अपने सौर मण्डल के तारे सूर्य , पृथ्वी के उपग्रह चन्द्रमा तथा सभी ग्रहों को विस्तार में समझते हैं।

सूर्य (The sun)

सूर्य हमारे सौर मण्डल का तारा है जिसका निर्माण लगभग 4.6 अरब वर्ष पहले हुआ था।सूर्य  71% हाइड्रोजन, 26.5%हीलियम तथा 2.5% अन्य up तत्वों से मिलकर बना है।सूर्य हमारी आकाशगंगा के केंद्र सुपर मैसिव ब्लॉक होल 30,000 प्रकाश वर्ष दूर है।

सूर्य हमारे आकाशगंगा के केन्द्र अर्थात सुपर मैसिव ब्लाक होल की परिक्रमा 250किमी/सेकेंड से करता है तथा सूर्य को एक परिक्रमा पूरी करने में 25 करोड़ वर्षों का समय लगता है ।  सूर्य का व्यास 13 लाख 92 हजार किलोमीटर है जो पृथ्वी के व्यास से लगभग 110 गुना है तथा सूर्य का द्रव्यमान 1.989×1030 किलोग्राम  है जो कि हमारी पृथ्वी से लगभग 3,30,000 गुना है। सूर्य की तीव्र गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण हमारे सौर मण्डल के ग्रह तथा अन्य पिंड सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

चन्द्रमा (The moon)

चन्द्रमा हमारे ग्रह पृथ्वी का उपग्रह है।वैज्ञानिक मानते हैं कि लगभग 450 करोड़ वर्ष पूर्व थैया नामक उल्का पिण्ड पृथ्वी से टकरा गया जिससे पृथ्वी का कुछ भग टूट गया , जिससे चन्द्रमा का निर्माण हुआ। चन्द्रमा की पृथ्वी से दूरी 384,403 किलोमीटर है। चन्द्रमा हमारे ग्रह पृथ्वी की परिक्रमा करती है। चंद्रमा पृथ्वी का एक चक्कर 28.3 दिन में पूरा करती है तथा अपने अक्ष पर भी एक चक्कर 28.3 दिन में ही पूरा करती है। चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की तुलना में 1/6 है।चन्द्रमा का स्वम का प्रकाश नहीं है ये सूर्के प्रकाश से चमकता है।

सौर मण्डल के ग्रह (Planets of our solar system)

किसी भी सौर मण्डल में सबसे महत्वपूर्ण उस सौर मण्डल के ग्रह होते हैं क्योंकि जीवन की संभावना तो ग्रहों पर ही की जा सकती है जैसे हमारी पृथ्वी पर जीवन मानव जाति तथा अनेक जीव -जंतुओं के रूप में पनप रहा है। हमारे सौर मण्डल में प्रमुखता आठ ग्रह हैं।

प्रारंभ में वैज्ञानिकों द्वारा 9 ग्रहों की पुष्टि की गई थी परंतु Pluto का आकार छोटा होने के कारण इसे ग्रहों की श्रेणी से हटा दिया गया है। हाल ही में अमेरिका के वैज्ञानिकों ने घोषणा की है कि उन्होंने हमारे सौर मण्डल में एक नया ग्रह planet -X खोजा है जो कि हमारी पृथ्वी से 10 गुना बड़ा है तथा सूर्य की एक परिक्रमा 20 हजार वर्षों में लगता है फिलहाल अभी यह हमारे सौर मण्डल के ग्रहों में नहीं जोड़ा जाता है परंतु हो सकता है कि बहुत जल्द ही हमारे सौर मंडल में 9 ग्रहों की पुष्टि हो।

आइये तब तक आठ ग्रहों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

1.बुद्ध(Mercury planet)

बुद्ध हमारे सौर मण्डल का सबसे छोटा ग्रह है तथा हमारे सौर मण्डल के तारे सूर्य के सबसे समीप स्थित है। इसका द्रव्यमान 3.3022×1023 कि.ग्राg है । बुद्ध हमारे सौर मण्डल के तारे सूर्य से लगभग 5 करोड़ 76 लाख किलोमीटर दूर अपनी कक्षा में गतिमान है। यह सूर्य की परिक्रमा 1लाख 80 हजार किलोमीटर / घंटा की गति से 88 दिन में पूरी करता है।इस ग्रह का कोई उपग्रह नहीं है। बुद्ध का व्यास 4880 किलोमीटर है बुद्ध ग्रह, पृथ्वी से 26 गुना छोटा है। बुद्ध ग्रह पर दिन में तापमान लगभग 450℃ तथा रात में 0℃ से भी नीचे -176℃ तक गिर जाता है।

2.शुक्र( Venus planet)

शुक्र आकार की दृष्टि से हमारे सौर मण्डल का छठवां बड़ा ग्रह है। हमारे सौर मण्डल के तारे सूर्य से निकटता की दृष्टि से इसे द्वतीय स्थान प्राप्त है। इसका द्रव्यमान 4.868 5×1024 किग्रा है। शुक्र हमारे सौर मण्डल के तारे से 10 करोड़ 42 लाख किलोमीटर दूर अपनी कक्षा में गतिमान है। यह सूर्य की एक परिक्रमा 224.698 दिनों में पूरी करता है।बुद्ध की तरह इस ग्रह का भी कोई उपग्रह नहीं है। शुक्र का व्यास 12,104 किलोमीटर है ।शुक्र ग्रह का औसत तापमान लगभग 480℃ है। शुक्र ग्रह के वातावरण में 96.5% कार्बनडाई ऑक्ससाइड है जो सूर्य की गर्मी को सोखती रहती है। शुक्र हमारे सौर मंडल का सबसे गर्म ग्रह है जिस पर लगभग 1000 से भी ज्यादा ज्वालामुखी हैं।

3.पृथ्वी (Earth planet)

वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी हमारे सौर मण्डल का एक मात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन है। हमारे सौर मण्डल के तारे सूर्य से निकटता की दृष्टि से पृथ्वी का स्थान तीसरा है। इसका द्रव्यमान 5.97219×1024 किलोग्राम है। पृथ्वी हमारे सौर मंडल के तारे सूर्य से 14.70 से 15.21 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर अपने अक्ष पर दीर्घवृत्ताकार पथ पर गतिमान है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा 29.72 किलोमीटर /सेकेंड की गति से करती है तथा इसे एक चक्कर पूरा करने में 365 दिन , 5 घंटे , 48 मिनट तथा 46 सेकेंड लगते हैं। इस ग्रह का प्राकृतिक उपग्रह चन्द्रमा है। पृथ्वी के 71% भाग पर जल तथा 29 % भाग स्थलीय है। जल की अधिकता होने के कारण पृथ्वी अन्तरिक्ष से नीली दिखाई देती है।

4.मंगल (Mars or red planet)

प्राचीन काल से ही मंगल ग्रह को हमारे सौर मंडल में प्रमुख स्थान प्राप्त है। इसका रंग लाल होने के कारण प्राचीन संस्कृतियों में इसे लाल ग्रह की संज्ञा दी गयी है। मंगल आकर की दृष्टि से हमारे सौर मण्डल में चौथा बड़ा ग्रह है तथा सूर्य से निकटता की दृष्टि से भी चौथे स्थान पर है। इसका द्रव्यमान 6.39×1023 किलोग्राम है। इसका व्यास लगभग 6794 किलोमीटर है। मंगल हमारे सौर मण्डल के तारे सूर्य से 22.80 करोड़ किलोमीटर दूर अपनी कक्षा में गतिमान है। मंगल 24.077 किलोमीटर /सेकेंड की गति से सूर्य की परिक्रमा करता है तथा इसे सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में 686.971 दिनों का समय लगता है। इसके दो प्राकृतिक उपग्रह हैं। मंगल ग्रह का औसतन तापमान 55℃ है।

5.बृहस्पति (Jupiter planet) 

बृहस्पति हमारे सौर मण्डल में आकर में सबसे बड़ा ग्रह तथा सूर्य से निकटता की दृष्टि से पांचवा स्थान प्राप्त है। इसका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के हजारवें भाग के बराबर तथा हमारे सौर मण्डल के सभी ग्रहों के द्रव्यमानों के योग का ढाई गुना है। बृहस्पति का द्रव्यमान 1898130 खरब किलोग्राम है। यह सूर्य से 77 करोड़ 83 लाख 40 हज़ार 821 किलोमीटर दूरी पर अपने अक्ष पर गतिमान है।यह सूर्य का एक चक्कर 4332.82 दिनों (पृथ्वी के दिन)में पूरा करता है।इसका औसत तापमान -108℃ है। बृहस्पति को एक गैसीय ग्रह के रूप में वर्गीकृत किया गया है । बृहस्पति का अधिकांश भाग हाइड्रोजन से बना है।

6.शनि (Saturn planet)

शनि ग्रह , बृहस्पति ग्रह के बाद हमारे सौर मण्डल का सबसे बड़ा ग्रह है तथा पृथ्वी से लगभग 9 गुना बड़ा है। सूर्य से दूरी में यह छठें स्थान पर है। इसका द्रव्यमान 5.6846×1026किलोग्राम है। शनि ग्रह सूर्य से 142 करोड़ 66 लाख , 66 हजार , 421 किलोमीटर की दूरी पर अपने कक्षा में गतिमान है। यह 9.67 किलोमीटर /सेकेंड की गति से सूर्य की परिक्रमा करता है शनि 29 वर्षों (पृथ्वी के) में सूर्य का एक चक्कर पूरा करता है। शनि ग्रह का औसत तापमान -139 ℃ होता है। शनि ग्रह के 200 प्राकृतिक उपग्रह हैं।

शनि एक गैसीय ग्रह है हालांकि यह पूरी तरह गैसों से नहीं बना है यह प्रमुखता हायड्रोजन गैस का बना है। 

7.अरुण( Uranus planet)

सूर्य से दूरी के आधार पर हमारे सौर मण्डल में  अरुण सातवां , व्यास के आधार पर तीसरा तथा द्रव्यमान के आधार पर चौथा ग्रह है। अरुण का औसत व्यास 51,400 किलोमीटर है तथा यह सूर्य से 286,90,39,000 किलोमीटर की दूरी पर अपने कक्षा में गतिमान है। अरुण ग्रह के 27 प्राकृतिक उपग्रह हैं। अरूण ग्रह का औसत तापमान 197.15℃ होता है। यह भी एक गैसीय ग्रह है।

8.वरुण ( Neptune planet)

वरुण हमारे सौर मण्डल में सूर्य से दूरी में आठवां , व्यास में चौथा तथा द्रव्यमान में तीसरा बड़ा ग्रह है। वरुण का द्रव्यमान 1.0243×10 किलोग्राम है। शनि तथा अरूण की तरह यह भी एक गैसीय ग्रह है जहाँ पानी की बर्फ़ के अलावा अमोनिया तथा मीथेन गैसों की भी बर्फ़ जमी हुई है। 

अन्य पिंड

हमारे सौर मण्डल में ग्रह तथा उपग्रहों के अलावा भी कई नई पिंड , पत्थर तैरते रहते हैं जिनमें क्षुद्र ग्रह तथा धूम्रकेतु सम्मिलित हैं।

क्षुद्र ग्रह ( Asteroid )

क्षुद्र ग्रह चट्टानों तथा धातुओं से बनी आकृतियों हैं जो एक कंकड़ से लेकर 600 मील तक कि चौड़ाई के भी हो सकते हैं। ये भी सूर्य का चक्कर लगाते हैं परंतु इनका आकर इतना छोटा होता है कि इन्हें ग्रह नहीं कहा जा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये हमारे सौरमण्डल के निर्माण के पश्चात बचा मलमा है। इरोस सबसे बड़ा क्षुद्र ग्रह है जिस पर नासा 12 जनवरी, 2001 को नियर नामक अंतरिक्ष यान उतार चुका है।

धूम्रकेतु(Comet)

धूम्रकेतु जिसे हम पुच्छल तारा भी कहते हैं प्रायः धूल , बर्फ़ , कार्बन डाई ऑक्ससाइड , अमोनिया तथा मीथेन का बना गोला होता है। धूम्रकेतु में एक बर्फीला केन्द्र होता है जिसके चारों ओर गैस के बादल होते हैं। जब धूम्रकेतु हमारे सौर मण्डल के तारे सूर्य के समीप से गुजरता है तो इसके केंद्र में उपस्थित बर्फ़ वाष्पीकृत हो जाती है तथा पुच्छ का निर्माण करती हैं।

निष्कर्ष

हमारे सौर मंडल में, एक तारा , आठ कई , कई क्षुद्र कई और धूम्रकेतु मौजूद हैं। जिनमें से हम मानव चंद्रमा पर जा चुके हैं और मंगल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार हमारे सौर मण्डल में प्रथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन मानव सभ्यता के रूप में पनप रहा है।

अगर आपके मन में हमारे सौर मण्डल को लेकर कोई प्रश्न हो तो कॉमेंट में जरूर पूछें।

Thanks for reading our artical, I hope you will give me another chance to discuss new mystry.

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