भानगढ़ के भूतिया किले की कहानी

हैलो! दोस्तों मेरा नाम राघवेन्द्र है और आप पढ़ रहे हैं “Mysterious universe”.

आप सबने बूढ़े बुजुर्गों , लोगों और दोस्तो से भूतों के बारे में सुना होगा। अनेकों लोग तो भूत देखने और उनसे बातें करने का भी दावा करते हैं। आप भी ऐसे अनेकों लोगो से मिले होगे जिन्होंने भूत के साथ हुए अपने अनुभव को बताया होगा। हालांकि लोगो का भूत – प्रीतों को लेकर अलग – अलग मत है कुछ लोग भूतों के अस्तित्व पर विश्वास करते हैं तो कुछ भूतों को अन्धिश्वास मात्र मानते हैं। विज्ञान भूत को नहीं मानता फिर भी लगभग हर देश में ऐसे अनेकों स्थान मिल जायेगे जहां जाना सरकार की तरफ से मना है क्योंकि वो ज्यादा डरावनी जगहें ( Most honted places ) है। हमारे भारत में भी ऐसे अनेकों स्थान हैं जहां सरकार ने रात्रि में जाने पर रोक लगा दी है और इन्हीं हॉन्टेड जगहों में से पहले नंबर पर है भानगढ़ का किला।

भारत की सबसे भूतिया जगह भानगढ़ का किला

लोगो का मानना है कि भानगढ़ का किला श्रापित है और इसमें भूतों का साया रहता है इसलिए लोग भानगढ़ के किले को देखने दिन में तो जा सकते हैं परन्तु सरकार ने इसे मोस्ट हॉन्टेड प्लेस घोषित करके लोगो का रात्रि में जाना वर्जित कर दिया है। भानगढ़ के पास के गांवों के लोगों का मानना है कि भानगढ़ के किले से रात्रि में आवाजे आती हैं और किले का माहौल बहुत डरावना हो जाता है।

भानगढ़ की स्थति और इतिहास

भारत के राजस्थान राज्य के अलवर जिले में एक भानगढ़ नाम का गांव है जिसमें एक किला है जिसे आज से लगभग 500 साल पहले अजमेर के भगवंत दास ने अपने पुत्र मधोवसिंह के लिए इस किले को बनवाया था और भानगढ़ शहर को बसाया था। इस किले का नाम माधो सिंह के पितामह भान सिंह के नाम पर रखा गया था।

भानगढ़ के बीरान होने के पीछे की कहानियां

कभी भानगढ़ भी एक फलता फूलता शहर था जो आज बीरान पड़ा है जहां लोग रात्रि में जाने से कतराते हैं तो आखिर ऐसा क्या हुआ था भानगढ़ में जिससे एक फलता – फूलता शहर बीरान हो गया। भानगढ़ के बीरान होने के पीछे अनेकों कहानियां प्रचलित हैं जिनमें से प्रमुख निम्न प्रकार हैं।

1.तांत्रिक का श्राप

सर्वाधिक प्रचलित कहानी के अनुसार, भानगढ़ की राजकुमारी रतनावती अति सुन्दर थी। राजकुमारी की सुंदरता की चर्चा न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश में थी। उस समय उनकी उम्र 18 वर्ष की थी और उनका यौवन उनके रूप में निखार का चुका था।

अनेकों राज्यों के राजकुमार और राजा उनसे विवाह करना चाहते थे। अनेकों राजकुमारों के प्रस्ताव भी आ रहे थे। उसी दौरान राजकुमारी अपनी सखियों के साथ बाजार गई। राजकुमारी एक इत्र कि दुकान पर इत्र को हाथ में लेकर इत्र की खूसबू ले रहीं थीं। उसी दुकान से थोड़ी दूर पर एक व्यक्ति सिंधु सेवड़ा राजकुमारी को घूर रहा था। सिंधु सेवड़ा उस राज्य का एक बहुत बड़ा तांत्रिक था और वह राजकुमारी को किसी भी हालत में हासिल करना चाहता था।

तांत्रिक सिंधु सेवड़ा ने उसी दुकान के पास आकर उस बोतल में काला जादू कर दिया जिसे राजकुमारी ने पसंद किया था जिससे , वो उसके बस में हो जाएं। राजकुमारी का कोई विश्वासपात्र यह बात समझ गया और उसने राजकुमारी को सब बता दिया। जिससे राजकुमारी ने पास ही पड़े एक पत्थर पर उस बोतल को पटक दिया। जैसे ही बोतल टूटी और इत्र पत्थर में लगा पत्थर पत्थर तांत्रिक की ओर बड़ने लगा , तांत्रिक ने अपनी मौत पास जान श्राप दिया कि किले में रहने वाले सभी लोग जल्द ही मारे जायेगे, पूरा भानगढ़ वीरान हो जाएगा और उनकी आत्माएं यहीं बतकती रहेगी। और पत्थर के नीचे दबने से तांत्रिक सिंधु सेवड़ा की मृत्यु हो गई।

उस घटना के कुछ दिन बाद ही भानगढ़ और अजबगढ़ के बीच युद्ध हुआ जिसमें राजकुमारी समेत सभी लोग मारे गए और भानगढ़ हमेशा के लिए वीरान हो गया।

2.साधु का श्राप

इस कहानी के अनुसार बताया जाता है कि राजा माधो सिंह ने इस शहर का निर्माण यहां तपस्या करने वाले एक साधु बुलू नाथ से अनुमति लेकर करवाया था। लेकिन बुलू नाथ ने एक शर्त पर शहर के निर्माण की आज्ञा दी थी कि महल की छाया उन पर न पड़े। और अगर ऐसा हुआ तो पूरा शहर खंडर हो जाएगा। किले के निर्माण करने वाले लोग यह बात भूल गए और उन्होंने किले को बहुत ऊंचा बना दिया जिससे किले कि छाया साधु उलूक नाथ के तप स्थान पर पड़ गई इससे क्रोधित होकर उन्होंने भानगढ़ को वीरान होने का श्राप दे दिया और कुछ ही दिनों में भानगढ़ वीरान हो गया।

भानगढ़ के खंडहर

भानगढ़ में प्रवेश करते ही सबसे पहले आपको प्राचीन बाजार के खंडहर मिलेगे। इसी स्थान पर किसी जमाने में भानगढ़ का भव्य बाजार लगता था, जो आज खंडहरों में टकदील हो चुका है। बाजार के दुकानों की छते ऐसे गिरी हुई है मानों लगता है कि इनपर कभी छत थीं ही न, इन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी ने तलवार से इन्हें बड़े सलीके से काटा हो। इस भानगढ़ नगर में एक नृतकी महल है , लोगो का मानना है कि इस महल से रात्रि में घुघरुओं के आवाजें आती हैं। वैसे जब कुछ वास्तुविदों ने इस जगह का परीक्षण किया तो बताया कि इस जगह बहुत से चमगादर और कॉक्रोच है जिसकी वजह से रात्रि में घुघरू जैसी आवाज आती है।

मृत्यु के बाद क्या होता है ?

मृत्यु के बाद क्या होता है इससे पहले आपको मृत्यु और शरीर को समझना होगा , योग के अनुसार हमारे शरीर 5 कोशो में बटा है पहला अन्नमय कोश यानी हमारा भौतिक शरीर जिसे हम देख सकते हैं इसके बाद आता है मनोमय कोश , तीसरे को प्राणमय कोश कहते हैं यानी ऊर्जा शरीर ।
 ‌भौतिक शरीर, मानसिक शरीर और ऊर्जा शरीर , ये तीनों भौतिक हैं। भौतिक शरीर स्थूल है, मानसिक शरीर सूक्ष्म और ऊर्जा शरीर और भी सूक्ष्म है शरीर के इन तीनों स्तरों पर कर्म की छाप होती है। कर्म के द्वारा ये तीनों स्तर आपस में जुड़े होते हैं। अगले दो कोशो को कहते हैं विज्ञानमय कोश और आनंदमय कोश । विज्ञानमय कोश अभौतिक है परंतु भौतिक से कुछ सम्बन्ध रखता है। आनंदमय शरीर पूरी तरह से अभौतिक और निराकार है , जो हमारे शरीर में तभी तक विद्यमान रहता है जब तक भौतिक , मानसिक और ऊर्जा शरीर सही रूप में हों। जिसे लोग आत्मा कहते हैं वास्तव में वो एक कल्पना है असल में लोग अभौतिक शरीर की एक सीमा को ही आत्मा के रूप में स्वीकार रहे हैं। लेकिन आत्मा के लिए डाचा अभी भी कर्म ही है अगर कर्म के डाचे को पूरी तरह गिरा दिया जाए तो आत्मा जैसी कोई चीज नहीं बचती सब एक दूसरे में विलीन हो जाता है। जब कोई मरता है तो हम कहते हैं कि ये व्यक्ति नहीं रहा ,ये सच नहीं है अब वो व्यक्ति वैसा नहीं है जैसा आप उसे जानते थे परन्तु वह अब भी मौजूद है । अगर आप अपने कर्म के डाचे को 100% नष्ट कर दे तो आप अस्तित्व में विलीन हो जाएंगे , इसी को हिन्दू परंपरा में मुक्ति, योग में महासमाधि और बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहा जाता है। मुक्ति का अर्थ है जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया से मुक्त हो जाना। जब कोई व्यक्ति मरता है तो उसको अपना भौतिक शरीर जो प्रकृति के द्वारा मिला था वापस करना पड़ता है और उस व्यक्ति का भौतिक अस्तित्व समाप्त हो जाता है परन्तु मानसिक और प्राणमय शरीर का अस्तित्व रहता है। अगर उसके कर्म का डाचा तीव्र है वो अभी खत्म नहीं हुआ है तो आपको उसे पूरा करना पड़ेगा , जिसे भूत योनि कहते हैं। अगर इसे नया शरीर पाना है तो इस डाचे की तीव्रता को कम होना होगा। अगर इसकी तीव्रता ज्यादा है तो इसे इंतजार करना होगा। इन्हें ही हम भूत कहते हैं जिसके कर्म का डाचा जितना तीव्र होगा वो उतना ज्यादा दिखेगा यानी हम उसे उतना ज्यादा महसूस कर सकेगें। ऐसे प्राणी हर तरफ मौजूद हैं आपको पता हो या न हो। परंतु हम ज्यादातर को महसूस नहीं कर पाते क्योंकि उनके कर्मों का डाचा कमजोर हो चुका होता है और वो इंतजार करते हैं इसका पूरी तरह से खाली होने का जिससे वी नया शरीर पा सके। इसीलिए लोग कहते हैं कि जिनकी कम उम्र में किसी दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है वो भूत बन जाते हैं नहीं भूत सभी बनते हैं परन्तु ऐसे व्यक्ति हमारे महसूस के लिए ज्यादा उपलब्ध होते हैं क्योंकि इनके कर्मो का डाचा बहुत तीव्र होता है। अगर कोई व्यक्ति अपने निर्धारित कर्म पूरे कर लेता है तो वो यू ही मर जाएगा बिना किसी दुर्घटना या विमारी के और ऐसा व्यक्ति केवल कुछ ही घंटो में नया शरीर पा लेगा। इसीलिए हर आध्यात्मिक व्यक्ति इस चक्र को तोड़कर मुक्त होना चाहता है । जिस प्रकार गुब्बारे में वायु भरी रहती है उसी प्रकार कर्म के डाचे में हमारी आत्मा होती है और जैसे ही हम उस गुब्बारे को फोड़ते हैं तो सारी हबा आपस में मिल जाती है उसी प्रकार अगर कर्म का डाचा पूरी तरह नष्ट हो जाता है तो आपकी आत्मा भी इस प्रकृति में विलीन हो जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाती है।

भूत किसे कहते हैं ?

हमारे धर्मो के अनुसार जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु होती असामान्य तरीके ( किसी दुर्घटना में ) तरीके से हो जाती है तो उसकी आत्मा उसके शरीर से निकल जाती है और वह आत्मा अपने लिए तय किए गए समय तक भूत योनि में अपना जीवन व्यतीत करती है और इसी आत्मा के इस रूप भूत कहते हैं। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु कम आयु में किसी दुर्घटना में हो जाती है तो उसकी आत्मा जो शरीर छोड़ चुकी होगी , भूत कहलाएगी और अपनी बाकी जिंदगी भूत के रूप में गुजरेगी और अंत में मुक्त हो जाएगी। कुछ महात्मा और साधु भी मानते हैं कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं है इसके बाद भी एक जीवन है , मृत्यु तो केवल जीवन के दो रूपों के बीच के एक संगम है। पैरानॉर्मल एक्सपर्ट की राय

पैरानॉर्मल एक्सपर्ट की राय

पैरानॉर्मल एक्सपर्ट उन लोगो को कहते हैं जो पैरानॉर्मल एक्टिविटी का निरीक्षण करते हैं। पैरानॉर्मल एक्सपर्ट के अनुसार नेगेटिव एनर्जी का अस्तित्व होता है। और जो जगह 40 दिन से ज्यादा दिनों तक खाली रहती है वहां नेगेटिव एनर्जी एकत्रित हो जाती है तो भानगढ़ अनेकों वर्षों से वीरान पड़ा है यहां नेगेटिव एनर्जी होने की संभावना ज्यादा है।

निष्कर्ष

भानगढ़ के खंडहर हमारे देश के प्राचीन भव्यता के अवशेष हैं जिसके साथ अनेकों कहानियां जुड़ी हैं वस कुछ लोग यहां भूतों या नेगेटिव एनर्जी के होने का दावा करते हैं जिस कारण सरकार ने रात। यहां जाने पर रोक लगा दी है। Disclaimer – “Mysterious Universe” का उद्देश्य किसी भी प्रकार के अंधविश्वास को बढावा देना नहीं है। हमने इस आर्टिकल में केवल उन्ही घटनाओं और तथ्यों का वर्णन किया है जो भानगढ़ के बारे में प्रचलित हैं। Mysterious Universe ऐसे किसी भी अंधविश्वास का समर्थन बिल्कुल भी नहीं करता है।

Thanks for reading our article, I hope you will give me another chance to discuss new mystry.

OUR RESENT ARTICALS

1. समय यात्रा – क्या past और future में जाना सम्भव है ?

2. एलियन – क्या इस ब्रह्माण्ड में किसी और ग्रह पर भी जीवन है ?

3. समानांतर ब्रह्माण्ड – क्या हमारे ब्रह्माण्ड की तरह अन्य ब्रह्माण्डो का भी अस्तित्व सम्भव है जिनमें हम और आप भी हों ?

4. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – बुद्धिमान मशीन और रोबोट्स।

5. बिग बैंग – ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति कैसे हुई ?

6. ब्रह्माण्ड कितना विशाल है जानिए ब्रह्माण्ड का विस्तार।

7. ब्लैक होल किसे कहते हैं ? क्या ब्लैक होल पूरी आकाशगंगा को निगल सकता है ?

Summary
Review Date
Reviewed Item
Article
Author Rating
5

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *