ब्लैक होल / black hole

हैलो! दोस्तों मेरा नाम राघवेन्द्र है और आप पढ़ रहे हैं “Mysterious universe”.

क्या आपने कभी ब्रह्माण्ड की विशालता की कल्पना की है? क्या आपने कभी सोचा है कि हमारा ब्रह्माण्ड कितना रोमांचकारी है ? हमारा ब्रह्माण्ड सूर्य , चाँद , तारे , अन्य ग्रह , धूम्रकेतु तथा अन्य रहस्यों से भरा पड़ा है। मनुष्य ने प्राचीन काल से ही इन रहस्यों में दिलचस्पी दिखाई है तथा इन रहस्यों को समझने का प्रयास करता रहा है। ब्रह्माण्ड के रहस्यों में सबसे बड़ा रहस्य है ब्लैक होल।

आपने हॉलीवुड की साइंस फिक्शन फिल्मों में ऐसे दृश्य तो देखे ही होंगे जिनमें आपको वस्तुयें , जीव-जंतुओं को किसी  काले छिद्र में समाते हुए देखा होगा तथा किसी-किसी फ़िल्म में तो ये वस्तुयें तथा जीव-जंतु उस छिद्र द्वारा दूसरी दुनिया मे पहुंच जाते हैं। ये तो फिल्मों की बात हुई । अब प्रश्न उठता है क्या ऐसा वास्तव में संभव है ? अगर विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो ऐसा बिल्कुल सम्भव है तथा हमारे ब्रह्माण्ड में ऐसी घटनायें लगातार चलती रहतीं हैं। जिसका कारण होता है ब्लैक होल ।

आइये इस लेख में ब्लैक होल के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं।

ब्लैक होल क्या है?

ब्लैक होल अंतरिक्ष में मौजूद ऐसे खगोलीय पिण्ड होते हैं जिनका घनत्व तथा गुरुत्वाकर्षण बल इतना अधिक होता है कि ये अन्य खगोलीय पिण्डों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं तथा उन्हें अस्तित्व हीन कर देते हैं यहां तक कि तारों का प्रकाश भी इनके पास से नहीं गुजर सकता। इन पिण्डों के तीव्र आकर्षक बल के कारण प्रकाश भी इन पिण्डों से नहीं बच पाता तथा इन्हीं में समा जाता है।

ब्लैक होल कैसे बनता है ? 

ब्लैक होल का निर्माण ब्रह्माण्ड में उपस्थित विशाल तारों के अंत से होता है। तारों की ऊर्जा तारों में होंने वाले नाभिकीय संलयन का परिणाम होता है। तारों की कोर में उपस्थित हाइड्रोजन फ़्यूज होकर हीलियम , हीलियम फ्यूज होकर कार्बन ,कार्बन फ़्यूज होकर नियॉन , यह प्रकिया चलती रहती है तथा अंत में कोर आयरन में परिवर्तित हो जाती है।और संलयन (फ्यूजन) की क्रिया बंद हो जाती है। संलयन की क्रिया बंद होते ही कोर का गुरुत्वाकर्षण , बहार की ओर लगने वाले दाब ( जो संलयन क्रिया के कारण उत्पन्न होता है ) से बहुत अधिक हो जाता है और कोर अपने ही गुरुत्वाकर्षण बल के कारण अपने ही अंदर सिकुड़ना प्रारंभ कर देता है। तथा बहुत ही कम समय में अरबों किलोग्राम द्रव्यमान एक अपने अंदर समाने लगता है जिसके फलस्वरूप एक माह विस्फोट के साथ तारा फट जाता है , तारे के फटने की इस क्रिया को सुपरनोवा कहते हैं। जिससे भयंकर ऊर्जा उत्सर्जित होती है  सूर्य जितनी ऊर्जा  अपने पूरे जीवन काल में उत्सर्जित करता है उससे लगभग सौ गुनी ऊर्जा सुपरनोवा के समय उत्सर्जित होती है और इस विस्फोट के परिणामतः बनता है ब्लैक होल , जिससे प्रकाश की किरणें भी बहार नहीं जा सकतीं हैं।

Gama ray burst and singularity

इन ब्लैक होल से ऊर्जा के दो जेट निकलते हैं जो ब्रह्माण्ड में बहुत तीव्र गति से फैलते हैं। इन्हें ही Gama ray burst कहते हैं ब्लैक होल में उपस्थित एक छोटे से बिंदु में तारे का सारा द्रव्यमान समाहित हो जाता है उस बिंदु को singularity कहते हैं। इस singularity के कारण Time-space ग्राफ में एक गहरा वक्र बनता है जिसमें बहार की ओर खुला हुआ एक मुख होता है जिसे event horizon कहते हैं। इसी कारण ब्लैक होल के पास समय की गति कम होती है।

ब्लैक होल के प्रकार

ब्लैक होल का अध्यन करने वाले वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल को तीन वर्गों में विभाजित किया है जो निम्न प्रकार हैं।

  1. Stellar mass black hole
  2. Supermassive black hole 
  3. Primordial black hole
  4. Stellar mass black hole

1. Stellar mass black hole

इस श्रेणी में ऐसे ब्लैक होल आते हैं जिनका निर्माण सूर्य के द्रव्यमान से कई गुना अधिक द्रव्यमान वाले तारों के गुरुत्वीय संकुचन के फलतः होता है। ऐसे ब्लैक होल stellar mass black hole कहलाते हैं।

2. Supermassive black hole

ऐसे ब्लैक होल जिनका निर्माण आकाशगंगा (Galaxy) के मध्य में होता है तथा जिनका घनत्व बहुत ही अधिक होता है supermassive black hole कहलाते हैं ।

ऐसे ब्लैक होल का द्रव्यमान हमारे तारे सूर्य से लाखों गुना अधिक होता है। हमारी आकाशगंगा में भी एक सुपर मैसिव ब्लैक होल interstellar A star मौजूद है।

3. Primordial black hole

हमारे ब्रह्माण्ड में कुछ ऐसे भी ब्लैक होल होते हैं जिनका द्रव्यमान हमारे सूर्य के द्रव्यमान से भी कम होता है तथा इनका निर्माण गुरुत्वीय संकुचन के कारण नहीं बल्कि अपने केन्द्रता पदार्थ और ताप के संपीड़न के कारण होता है ऐसे ब्लैक होल को primordial black hole कहते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि ऐसे ब्लाक होल्स का निर्माण ब्रह्माण्ड के निर्माण के साथ ही हुआ होगा।

हमारी आकाशगंगा के केंद्र में स्थित ब्लैक होल ( Sagittarius A star )

वैज्ञानिकों के अनुसार हमारी आकाशगंगा लगभग 13.21 अरब वर्ष पुरानी है तथा हमारे ब्रह्माण्ड की प्राचीन आकाशगंगाओ में से एक है। हमारी आकाशगंगा के केंद्र में स्थित Sagittarius A star एक सुपर मैसिव ब्लैक होल है। इस ब्लाक होल की दूरी हमारे सौर मण्डल से 26 हजार प्रकाश वर्ष है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस ब्लैक होल का व्यास 4 लाख 40 हजार किलोमीटर है। 

ब्लैक होल की प्रथम वास्तविक तस्वीर

विज्ञान और ब्रह्माण्ड के प्रति रुचि रखने वाले हर व्यक्ति के लिए ब्लैक होल हमेशा से ही रहस्य का विषय बना रहा है हालांकि ज्यादातर वैज्ञानिक ब्लैक होल के अस्तित्व में विश्वास रखते थे परन्तु अभी तक ब्लैक होल के अस्तित्व का कोई प्रमाण नहीं था। परंतु 10 अप्रैल , 2018 को हमारे वैज्ञानिक ब्लैक होल की पहली तस्वीर लेने में सफल हुए हैं। यह galaxy messier 87 आकाशगंगा के मध्य में स्थित है। जो हमारी प्रथ्वी से 53 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। इस ब्लैक होल की तस्वीर लेने के लिए Event horizon telescope का प्रयोग किया गया। यह टेलिस्कोप सिंगल टेलिस्कोप नहीं है बल्कि यह 8 रेडियो टेलिस्कोप को रेफेर करता है। जिन्हें पांच अलग अलग महाद्वीपों पर लगाया गया था।

निष्कर्ष

यह पूरा ब्रह्माण्ड रहस्यों से भरा है जिनमें ब्लैक होल सबसे बड़े रहस्यों में से एक है एक काले पिंड में हज़ारों ग्रह समा सकते हैं ये अभिधारणा मूवी या कल्पना तक सीमित नहीं है बल्कि ये भी हमारे ब्रह्माण्ड की हकीकतों में से एक है।

सायद अब आप ब्लैक होल के बारे में जान चुके होंगे अगर आपके मन मे ब्लैक होल को लेकर कोई प्रश्न हो तो कमेंट करें।

Thanks for reading our artical, I hope you will give me another chance to discuss new mystry.

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