क्या वास्तव में भूतों का कोई अस्तित्व है ?

हैलो! दोस्तों मेरा नाम राघवेन्द्र है और आप पढ़ रहे हैं “Mysterious universe”.

जब भी हमारे मन में भूतों – पिशाचों का विचार आता है तो हम अपने अंदर एक अजीब डर का अनुभव करते हैं। रात्रि में अगर कोई strange activity ( जैसे – लाइट का आना जाना, किसी साए का अनुभव होना, आवाजें सुनाई देना) होती है तो हम डर के कारण कांप जाते हैं और ये डर होता है भूत का।

आपने बूढ़े – बुजुर्गों , यार – दोस्तों और रिश्तेदरों से भूत के अनेकों सत्य अनुभव सुने होगें। और अखबारों में भूतों कि घटनाओं, भूतिया जगहों के बारे में पड़ा भी होगा। यहां तक कि अनेकों भूतिया फिल्में और सीरियल देखे होंगे।

जब भी हम किसी भूतिया घटना या भूतिया जगह के बारे में सुनते हैं तो हमें भूतों के अस्तित्व पर विश्वास होने लगता है। परंतु जब हम भूतों के बारे में वैज्ञानकों द्वारा की गई रिसर्चों को देखते हैं तो हमें भूतों के अस्तित्व पर यकीन नहीं होता। ज्यादातर लोग इसी कशमकश में पड़े रहते हैं कि भूत होते हैं या नहीं। इस आर्टिकल में मैंने भूतों से जुड़ी धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों मान्यताओं को सरल भाषा में समझाने का प्रयत्न किया है।

भूत किसे कहते हैं ?

ज्यादातर धर्मों और लोगों के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु अल्प अवस्था में हो जाती है तो वह भूत बन जाता है। यानी अगर कोई व्यक्ति कम आयु में किसी बीमारी, दुर्घटना या अन्य किसी कारण से मर जाता है तो उस व्यक्ति की आत्मा को ही हम भूत कहते हैं।

मृत्यु के बाद क्या होता है ?

मृत्यु के बाद क्या होता है इससे पहले आपको मृत्यु और शरीर को समझना होगा , योग के अनुसार हमारे शरीर 5 कोशो में बटा है पहला अन्नमय कोश यानी हमारा भौतिक शरीर जिसे हम देख सकते हैं इसके बाद आता है मनोमय कोश , तीसरे को प्राणमय कोश कहते हैं यानी ऊर्जा शरीर ।
 ‌भौतिक शरीर, मानसिक शरीर और ऊर्जा शरीर , ये तीनों भौतिक हैं। भौतिक शरीर स्थूल है, मानसिक शरीर सूक्ष्म और ऊर्जा शरीर और भी सूक्ष्म है शरीर के इन तीनों स्तरों पर कर्म की छाप होती है। कर्म के द्वारा ये तीनों स्तर आपस में जुड़े होते हैं। अगले दो कोशो को कहते हैं विज्ञानमय कोश और आनंदमय कोश । विज्ञानमय कोश अभौतिक है परंतु भौतिक से कुछ सम्बन्ध रखता है। आनंदमय शरीर पूरी तरह से अभौतिक और निराकार है , जो हमारे शरीर में तभी तक विद्यमान रहता है जब तक भौतिक , मानसिक और ऊर्जा शरीर सही रूप में हों। जिसे लोग आत्मा कहते हैं वास्तव में वो एक कल्पना है असल में लोग अभौतिक शरीर की एक सीमा को ही आत्मा के रूप में स्वीकार रहे हैं। लेकिन आत्मा के लिए डाचा अभी भी कर्म ही है अगर कर्म के डाचे को पूरी तरह गिरा दिया जाए तो आत्मा जैसी कोई चीज नहीं बचती सब एक दूसरे में विलीन हो जाता है। जब कोई मरता है तो हम कहते हैं कि ये व्यक्ति नहीं रहा ,ये सच नहीं है अब वो व्यक्ति वैसा नहीं है जैसा आप उसे जानते थे परन्तु वह अब भी मौजूद है । अगर आप अपने कर्म के डाचे को 100% नष्ट कर दे तो आप अस्तित्व में विलीन हो जाएंगे , इसी को हिन्दू परंपरा में मुक्ति, योग में महासमाधि और बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहा जाता है। मुक्ति का अर्थ है जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया से मुक्त हो जाना। जब कोई व्यक्ति मरता है तो उसको अपना भौतिक शरीर जो प्रकृति के द्वारा मिला था वापस करना पड़ता है और उस व्यक्ति का भौतिक अस्तित्व समाप्त हो जाता है परन्तु मानसिक और प्राणमय शरीर का अस्तित्व रहता है। अगर उसके कर्म का डाचा तीव्र है वो अभी खत्म नहीं हुआ है तो आपको उसे पूरा करना पड़ेगा , जिसे भूत योनि कहते हैं। अगर इसे नया शरीर पाना है तो इस डाचे की तीव्रता को कम होना होगा। अगर इसकी तीव्रता ज्यादा है तो इसे इंतजार करना होगा। इन्हें ही हम भूत कहते हैं जिसके कर्म का डाचा जितना तीव्र होगा वो उतना ज्यादा दिखेगा यानी हम उसे उतना ज्यादा महसूस कर सकेगें। ऐसे प्राणी हर तरफ मौजूद हैं आपको पता हो या न हो। परंतु हम ज्यादातर को महसूस नहीं कर पाते क्योंकि उनके कर्मों का डाचा कमजोर हो चुका होता है और वो इंतजार करते हैं इसका पूरी तरह से खाली होने का जिससे वी नया शरीर पा सके। इसीलिए लोग कहते हैं कि जिनकी कम उम्र में किसी दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है वो भूत बन जाते हैं नहीं भूत सभी बनते हैं परन्तु ऐसे व्यक्ति हमारे महसूस के लिए ज्यादा उपलब्ध होते हैं क्योंकि इनके कर्मो का डाचा बहुत तीव्र होता है। अगर कोई व्यक्ति अपने निर्धारित कर्म पूरे कर लेता है तो वो यू ही मर जाएगा बिना किसी दुर्घटना या विमारी के और ऐसा व्यक्ति केवल कुछ ही घंटो में नया शरीर पा लेगा। इसीलिए हर आध्यात्मिक व्यक्ति इस चक्र को तोड़कर मुक्त होना चाहता है । जिस प्रकार गुब्बारे में वायु भरी रहती है उसी प्रकार कर्म के डाचे में हमारी आत्मा होती है और जैसे ही हम उस गुब्बारे को फोड़ते हैं तो सारी हबा आपस में मिल जाती है उसी प्रकार अगर कर्म का डाचा पूरी तरह नष्ट हो जाता है तो आपकी आत्मा भी इस प्रकृति में विलीन हो जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाती है।

क्या भूत किसी के शरीर में प्रवेश कर सकते हैं ?

भूतों के भी प्रकार होते हैं हर भूत मानव शरीर में प्रवेश नहीं कर सकता है। ऐसे भूत जिनमें किसी को छूने की शक्ति नहीं होती, वे भूत न तो मानव शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और न ही मानव को हानि पहुंचा सकते हैं परन्तु कुछ ऐसे भूत होते हैं जिनमें छूने की सकती होती है ये मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर, पीड़ा दे सकते हैं। जिसे आम भाषा में कहते हैं कि भूत लग गया।

किसे लगता है भूत ?

भूत हर किसी व्यक्ति को नहीं लगते , ये कुछ विशेष प्रकार के लोगो को ही अपना शिकार बनते हैं जो निम्न प्रकार हैं।

1. कमजोर लोग

कुछ लोग दिल से भूत कमजूर या डरपोक होते हैं , ऐसे लोग भूत का नाम सुनकर ही डर जाते हैं और रात्रि या अकेले समय भूतों के बारे में सोचकर डरते रहते हैं ऐसे लोगों पर भूत जल्दी हावी होते हैं।

2. बुरे कर्म करने वाले को

धर्म के नियम अनुसार जो लोग तिथि (एकादशी, प्रदोष, अमावस्या, पूर्णिमा) और पवित्रता को नहीं मानते हैं, जो ईश्वर, देवता और गुरु का अपमान करते हैं और जो पाप कर्म (शराब, मांस, संभोगआदि) में ही सदा रत रहते हैं ऐसे लोग आसानी से भूतों के चंगुल में आ सकते हैं।

3. जो लोग रात्रि में कर्म या अनुष्ठान करते हैं ?

हिन्दू धर्म के अनुसार कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य रात्रि में नहीं किया जाता क्योंकि रात्रि में बुरी शक्तियों का प्रभुत्व होता है इसलिए को लोग रात्रि में कोई अनुष्ठान करते हैं वे लोग आसानी से भूतों के शिकार हो जाते हैं।

4. ज्योतिष के अनुसार

ज्योतिषानसार कुंडली में राहु की विशेष स्थिति में भी भूत से कुछ लोग ग्रस्त हो जाते हैं। जैसे राहु यदि लग्न में या अष्टम भाव में होता है और उस पर अन्य क्रूर ग्रहों की दृष्टि है। ऐसी स्थिति में भूत के होने का उक्त व्यक्ति को अहसास होता रहता है। जो राक्षसगण के लोग हैं उन्हें भूत के होने का अहसास तुरंत ही हो जाता है।

प्रेत लगा है इसकी पहचान क्या है?

भूतादि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान उसके स्वभाव एवं क्रिया में आए बदलाव से की जाती है। अगल-अलग स्वाभाव परिवर्तन अनुसार जाना जाता है कि व्यक्ति कौन से भूत से पीड़ित है।

1.भूत पीड़ा : 

यदि किसी व्यक्ति को भूत लग गया है तो वह पागल की तरह बात करने लगता है। मूढ़ होने पर भी वह किसी बुद्धिमान पुरुष जैसा व्यवहार भी करता है। गुस्सा आने पर वह कई व्यक्तियों को एक साथ पछाड़ सकता है। उसकी आंखें लाल हो जाती हैं और देह में सदा कंपन बना रहता है। 

2. पिशाच पीड़ा :

 पिशाच प्रभावित व्यक्ति सदा खराब कर्म करना है जैसे नग्न हो जाना, नाली का पानी पीना, दूषित भोजन करना, कटु वचन कहना आदि। वह सदा गंदा रहता है और उसकी देह से बदबू आती है। वह एकांत चाहता है। इससे वह कमजोर होता जाता है। 

3. प्रेत पीड़ा :

 प्रेत से पीड़ित व्यक्ति चिल्लाता और इधर-उधर भागता रहता है। वह किसी का कहना नहीं सुनता। वह हर समय बुरा बोलता रहता है। वह खाता-पीता नही हैं और जोर-जोर से श्वास लेता रहता है। 

4. शाशाकिनीड़ा : 

शाकिनी से ज्यादातर महिलाएं ही पीड़ित रहती हैं। ऐसी महिला को पूरे बदन में दर्द बना रहता है और उसकी आंखों में भी दर्द रहता है। वह अक्सर बेहोश भी हो जाती है। कांपते रहना, रोना और चिल्लाना उसकी आदत बन जाती है। 

5. चुडैल पीड़ा :

 चुडैल भी ज्यादातर किसी महिला को ही लगती है। ऐसी महिला यदि शाकाहारी भी है तो मांस खाने लग जाएगी। वह कम बोलती, लेकिन मुस्कुराती रहती है। ऐसी महिला कब क्या कर देगी कोई भरोसा नहीं। 

6. यक्ष पीड़ा :

 यक्ष से पीड़ित व्यक्ति लाल रंग में रुचि लेने लगता है। उसकी आवाज धीमी और चाल तेज हो जाती है। वह ज्यादातर आंखों से इशारे करता रहता है। इसकी आंखें तांबे जैसी और गोल दिखने लगती हैं। 

7.ब्रह्मराक्षस पीड़ा : 

जब किसी व्यक्ति को ब्रह्मराक्षस लग जाता है तो ऐसा व्यक्ति बहुत ही शक्तिशाली बन जाता है। वह हमेशा खामोश रहकर अनुशासन में जीवन यापन करता है। इसे ही जिन्न कहते हैं। यह बहुत सारा खाना खाते हैं और घंटों तक एक जैसे ही अवस्था में बैठे या खड़े रहते हैं। जिन्न से ग्रस्त व्यक्ति का जीवन सामान्य होता है ये घर के किसी सदस्य को परेशान भी नहीं करते हैं बस अपनी ही मस्ती में मस्त रहते हैं। जिन्नों को किसी के शरीर से निकालना अत्यंत ही कठीन होता है। इस तरह से और भी कई तरह के भूत होते हैं जिनके अलग अलग लक्षण और लक्ष्य होते हैं।

भूत अपनी शक्ति से क्या-क्या कर सकता है?

भूतों की शक्ति भूत-प्रेतों की गति एवं शक्ति अपार होती है। इनकी विभिन्न जातियां होती हैं और उन्हें भूत, प्रेत, राक्षस, पिशाच, यम, शाकिनी, डाकिनी, चुड़ैल, गंधर्व आदि कहा जाता है। प्रेतयोनि में जाने वाले लोग अदृश्य और बलवान हो जाते हैं। लेकिन सभी मरने वाले इसी योनि में नहीं जाते और सभी मरने वाले अदृश्य तो होते हैं लेकिन बलवान नहीं होते। यह आत्मा के कर्म और गति पर निर्भर करता है। बहुत से भूत या प्रेत योनि में न जाकर पुन: गर्भधारण कर मानव बन जाते हैं।

भूत की ताकत :

 भूत अदृश्य होते हैं। भूत-प्रेतों के शरीर धुंधलके तथा वायु से बने होते हैं अर्थात् वे शरीर-विहीन होते हैं। इसे सूक्ष्म शरीर कहते हैं। आयुर्वेद अनुसार यह 17 तत्वों से बना होता है। कुछ भूत अपने इस शरीर की ताकत को समझ कर उसका इस्तेमाल करना जानते हैं तो कुछ नहीं। कुछ भूतों में स्पर्श करने की ताकत होती है तो कुछ में नहीं। जो भूत स्पर्श करने की ताकत रखता है वह बड़े से बड़े पेड़ों को भी उखाड़ कर फेंक सकता है। ऐसे भूत यदि बुरे हैं तो खतरनाक होते हैं। यह किसी भी देहधारी (व्यक्ति) को अपने होने का अहसास करा देते हैं। इस तरह के भूतों की मानसिक शक्ति इतनी बलशाली होती है कि यह किसी भी व्यक्ति का दिमाग पलट कर उससे अच्छा या बुरा कार्य करा सकते हैं। यह भी कि यह किसी भी व्यक्ति के शरीर का इस्तेमाल करना भी जानते हैं। ठोसपन न होने के कारण ही भूत को यदि गोली, तलवार, लाठी आदि मारी जाए तो उस पर उनका कोई प्रभाव नहीं होता। भूत में सुख-दुःख अनुभव करने की क्षमता अवश्य होती है। क्योंकि उनके वाह्यकरण में वायु तथा आकाश और अंतःकरण में मन, बुद्धि और चित्त संज्ञाशून्य होती है इसलिए वह केवल सुख-दुःख का ही अनुभव कर सकते हैं।


भूतों से मुक्ति का उपाय क्या है?

हिन्दू धर्म में भूतों से बचने के अनेकों उपाय बताए गए हैं। पहला धार्मिक उपाय यह कि गले में ॐ या रुद्राक्ष का लाकेट पहने, सदा हनुमानजी का स्मरण करें। चतुर्थी, तेरस, चौदस और अमावस्य को पवि‍त्रता का पालन करें। शराब न पीएं और न ही मांस का सेवन करें। सिर पर चंदन का तिलक लगाएं। हाथ में मौली (नाड़ा) अवश्य बांधकर रखें।

घर में रात्रि को भोजन पश्चात सोने से पूर्व चांदी की कटोरी में देवस्थान पर कपूर और लौंग जला दें। इससे आकस्मिक, दैहिक, दैविक एवं भौतिक संकटों से मुक्त मिलती है। प्रेत बाधा दूर करने के लिए पुष्य नक्षत्र में धतूरे का पौधा जड़ सहित उखाड़कर उसे ऐसा धरती में दबाएं कि जड़ वाला भाग ऊपर रहे और पूरा पौधा धरती में समा जाए। इस उपाय से घर में प्रेतबाधा नहीं रहती। प्रेत बाधा निवारक हनुमत मंत्र- ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ऊँ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत पिशाच-शाकिनी-डाकिनी-यक्षणी-पूतना-मारी-महामारी, यक्ष राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकम्‌ क्षणेन हन हन भंजय भंजय मारय मारय शिक्षय शिक्षय महामारेश्वर रुद्रावतार हुं फट् स्वाहा। इस हनुमान मंत्र का पांच बार जाप करने से भूत कभी भी निकट नहीं आ सकते। हनुमान जी के बाद मां कालका के स्मरण मात्र से किसी भी प्रकार की भूतबाधा है तो तत्काल ही हट जाती है। मां काली के कालिका पुराण में कई मंत्रों का उल्लेख मिलता है।

सरसों के तेल का या शुद्ध घी का दिया जलाकर काजल बना लें। ये काजल लगाने से भूत, प्रेत, पिशाच आदि से रक्षा होती है और बुरी नजर से भी रक्षा होती है। चरक संहिता में प्रेत बाधा से पीड़ित रोगी के निदान के उपाय विस्तार से मिलते हैं। ज्योतिष साहित्य के मूल ग्रंथों- प्रश्नमार्ग, वृहत्पराषर, होरा सार, फलदीपिका, मानसागरी आदि में ज्योतिषीय योग हैं जो प्रेत पीड़ा, पितृदोष आदि बाधाओं से मुक्ति का उपाय बताते हैं। अथर्ववेद में दुष्ट आत्माओं को भगाने से संबंधित अनेक उपायों का वर्णन मिलता है।

 सावधानी :

 नदी, पूल या सड़क पार करते समय भगवान का स्मरण जरूर करें। एकांत में शयन या यात्रा करते समय पवित्रता का ध्यान रखें। पेशाब करने के बाद धेला अवश्य लें और जगह देखकर ही पेशाब करें। रात्रि में सोने से पूर्व भूत-प्रेत पर चर्चा न करें। किसी भी प्राकार के टोने-टोटकों से बच कर रहें। ऐसे स्थान पर न जाएं जहां पर तांत्रिक अनुष्ठान होता हो, जहां पर किसी पशु की बलि दी जाती हो या जहां भी लोबान आदि धुंवे से भूत भगाने का दावा किया जाता हो। भूत भागाने वाले सभी स्थानों से बच कर रहें, क्योंकि यह धर्म और पवित्रता के विरुद्ध है। जो लोग भूत, प्रेत या पितरों की उपासना करते हैं वह राक्षसी कर्म के होते हैं ऐसे लोगों का संपूर्ण जीवन ही भूतों के अधिन रहता है। भूत-प्रेत से बचने के लिए ऐसे कोई से भी टोने-टोटके न करें जो धर्म विरुद्ध हो। हो सकता है आपको इससे तात्कालिक लाभ मिल जाए, लेकिन अंतत: जीवन भर आपको परेशान ही रहना पड़ेगा। 

अन्य उपाय :

यदि बच्चा बाहर से आए और थका, घबराया या परेशान सा लगे तो यह नजर लगने की पहचान है। ऐसे में उसके सर से 7 लाल मिर्च और एक चम्मच राई के दाने 7 बार घूमाकर उतारा कर लें और फिर आग में जला दें। यदि डरावने सपने आते हों, तो हनुमान चालीसा और गजेंद्र मोक्ष का पाठ करें और हनुमान मंदिर में हनुमानजी का श्रृंगार करें व चोला चढ़ाएं। अशोक वृक्ष के सात पत्ते मंदिर में रख कर पूजा करें। उनके सूखने पर नए पत्ते रखें और पुराने पत्ते पीपल के पेड़ के नीचे रख दें। यह क्रिया नियमित रूप से करें, घर भूत-प्रेत बाधा, नजर दोष आदि से मुक्त रहेगा।

निष्कर्ष

भूतों – प्रीतो के बारे में हमारे धर्मों में अनेकों स्थानों पर विवरण आता है और हमारे समाज में भूतों को लेकर अनेक कहानियां प्रचलित हैं। लेकिन विज्ञान अभी तक भूतों को नहीं मानता है।

Disclaimer – “Mysterious Universe” का उद्देश्य किसी भी प्रकार के अंधविश्वास को बढावा देना नहीं है। हमने इस आर्टिकल में केवल उन्ही घटनाओं और तथ्यों का वर्णन किया है जो भूतों के में प्रचलित हैं। Mysterious Universe ऐसे किसी भी अंधविश्वास का समर्थन बिल्कुल भी नहीं करता है।


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