एलियन/परग्रही

हैलो! दोस्तों मेरा नाम राघवेन्द्र है और आप पढ़ रहे हैं “Mysterious universe”.

प्राचीन काल से ही मनुष्य प्राचीन ग्रंथों, कथाओं , कहानियों में दूसरी दुनियां, देवता , दानवों के बारे में सुनता चला आ रहा है और मनुष्य दूसरी दुनियां के रहस्य के प्रति हमेशा से जिज्ञासु रहा है। दूसरी दुनियां को लेकर हमारे मन में अनेक प्रश्न आते हैं । क्या दूसरी दुनियां का कोई अस्तिव वास्तव में है या ये मनुष्य की एक कल्पना मात्र है।

जब भी हम रात्रि में चमकते हुए तारों को देखते हैं तो हमारे मन में अनेक प्रश्न आते हैं जैसे क्या इस अनन्त ब्रह्माण्ड में हमारे ग्रह के अलावा कहीं और भी जीवन है? क्योंकि इन चमकते हुए तारों कि तरह हमारा सूर्य भी एक तारा ही है जिसके चारों ओर हमारे सौर मण्डल के ग्रह चक्कर लगा रहे हैं जिनमें से प्रथ्वी भी एक ग्रह है और यहां जीवन मानव सभ्यता के रूप में पनप रहा है। जिन तारों को हम अपनी आंखों से देख पाते हैं ये पूरे ब्रह्माण्ड का मात्र एक अंश भाग हैं। इस ब्रह्माण्ड में असंख्य तारें हैं और उनकी परिक्रमा करते अनगिनत ग्रह। तो ऐसा बिल्कुल सम्भव है कि इनमें से बहुत से ग्रहों जीवन पनप रखा हो , किसी ग्रह की सभ्यताएं हमारी मानव सभ्यता से ज्यादा विकसित होगी तो किसी ग्रह की कम विकसित।

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एलियन/परग्रही किसे कहते हैं?

प्रथ्वी एक ग्रह है जिस पर जीवन अनेक जीव – जंतुओं के रूप में फल – फूल रहा है जिसमें सबसे विकसित जीव हम मनुष्य है वैज्ञानिक भाषा में ऐसे विकसित जीवों को सभ्यता कहा जाता है जैसे मनुष्य को मानव सभ्यता कहा जाता है। हमारे ब्रह्माण्ड में अनगिनत ग्रह मौजूद हैं जिनमें से अनेकों ग्रहों पर सभ्यताएं पनप रही होंगी , जिन्हें हम एलियन कहते हैं। सरल भाषा में कहा जाए तो दूसरे ग्रह के प्राणी को एलियन या परग्रही कहते हैं।

उदाहरण-

अगर हम किसी ऐसे ग्रह पर जाते हैं जहां जीवन पनप रहा हो या उस ग्रह के प्राणी हमारे ग्रह पर आते हैं तो उन्हें एलियन क़हा जाएगा। और उन दूसरे ग्रहों के प्राणियों के लिए हम एलियन होंगे।

UFO / उड़नतस्तरी किसे कहते हैं?

जब मनुष्य प्रथ्वी से किसी अन्य ग्रह पर जाता है तो अंतरिक्ष यान से जाता है ,उसी प्रकार जब अन्य किसी ग्रह के प्राणी अर्थात् एलियन हमारे ग्रह पर आते हैं तो अपने अंतरिक्ष यान से आते हैं , सबसे पहले देखे जाने वाले एलियन के अंतरिक्ष यान का आकार तश्तरी के आकर का था इसलिए एलियन के अंतरिक्ष यान को उड़नतश्तरी कहा जाने लगा। चूकी इसे अंतरिक्ष यान की हमारे ग्रह पर कोई पहचान / identity नहीं हो पाती इसीलिए इन एलियन अंतरिक्ष यानों को unidentify flying object यानी UFO भी कहा जाता है क्योंकि ये हमारे ग्रह के होते ही नहीं हैं।

एलियन/परग्रही के अस्तित्व की सम्भावना

हमारे ब्रह्माण्ड का जन्म लगभग 13.7 अरब वर्षों पहले बिग-बैंग की घटना के फलस्वरूप हुआ था इसके बाद आकाशगंगाये, तारे, ग्रह तथा उपग्रहों का निर्माण प्रारंभ हुआ। इसी निर्माण प्रकिया में हमारा सूर्य तथा पृथ्वी बनी । अरबों वर्षों में हमारी पृथ्वी ठंडी हुई तथा हायड्रोजन तथा ऑक्सीजन के संघनन के फलस्वरूप हमारी पृथ्वी पर बारिश हुई तथा हमारी ग्रह पर जलाशय बनने लगे तथा वातावरण अस्तित्व में आता । अब प्रश्न उठता है कि ये प्रक्रिया पूरे ब्रह्माण्ड में केवल हमारे ग्रह पर अकेली तो हुई नहीं होगी मतलब ब्रह्माण्ड के कई ग्रहों पर वातावरण अस्तित्व में आया होगा। इसके बाद हमारे ग्रह पर एक कोशकीय जीवों का अस्तित्व में आना प्रारंभ हुआ और फिर जटिल संरचनायें बननी प्रारंभ हुई तो ऐसा अन्य कई ग्रहों पर भी तो हुआ होगा जिन पर जीवन के लिए अनुकूल वातावरण बना होगा । और जैसे मानव अस्तित्व में आया बैसे ही कई ग्रहों पर अन्य सभ्यताएं भी अस्तित्व में आई होंगी।

एलियन/परग्रही की संरचना या स्वरूप

जब भी हम एलियन शब्द सुनते हैं तो हमारे मस्तिष्क में छोटे कद, लंबे हाथों , बड़े सिर और बड़ी – बड़ी आंखों वाले जीव का चित्र आता है हॉलीवुड और बॉलीवुड की फिल्मों में भी एलियन को खुछ ऐसे ही रूप में दिखाया जाता है।तो क्या एलियन का स्वरूप ऐसा ही होता है , ऐसा आवश्यक नहीं है कि एलियन का स्वरूप निश्चित हो। प्रथ्वी पर उपस्थित मनुष्य यानी हमारा स्वरूप प्रथ्वी की भौगोलिक स्थितियों और विज्ञान के नियमों के कारण ऐसा है। इस ब्रह्माण्ड में असंख्य ग्रह हैं जिनपर भौगोलिक स्थितियां भी अलग – अलग होती हैं और जिन ग्रहों पर भी जीवन पनप रहा होगा , ये आवश्यक नहीं कि उन पर भौगोलिक स्थितियां भी समान हो , किसी भी ग्रह पर उपस्थित जीव की आकृति , स्वरूप उस ग्रह की भौगोलिक स्थितियों और जीव के जींस पर निर्भर करती है तो ये तो सम्भव नहीं की सभी ग्रहों के जीवों के जींस समान हो अर्थात् एलियन का कोई निश्चय स्वरूप नहीं होता है। हमारी प्रथ्वी पर जितने भी एलियन एनकाउंटर हुए हैं या जितने भी लोगों ने एलियन को देखने का दावा किया है उन सभी ने उपर्युक्त वर्णित स्वरूप का ही वर्णन किया है इसीलिए लोग एलियन को ऊपर बताए गए स्वरूप के रूप में ही जानते हैं।

एलियन /परग्रही सभ्यताओं का विभाजन

इस ब्रह्माण्ड को अस्तित्व में आये लगभग 14 अरब वर्ष हो गए हैं जिसमें हम मानव कुछ हजारों वर्षों से अस्त्तिव में आये हैं तथा हमने लगभग अपना ज्यादातर वैज्ञानिक विकास 100-150 सालों के अंदर ही इतना विकास कर लिया कि हम चांद पर जा चुके हैं तथा कुछ वर्षों में मंगल ग्रह पर जाने की कल्पना कर रहे हैं । तो आप उन सभ्यताओं के बारे में सोचिये जो हमारे ब्रह्माण्ड में हमसे करोड़ो या अरबों वर्षों पहले अस्तित्व में आई होंगी वो कितनी विकसित होंगी।

    आधुनिक वैज्ञानिकों ने एलियन सभ्यताओं को ऊर्जा के आधार पर पांच वर्गों में वर्गीकृत किया गया है।

टाइप-1( प्लेनेटरी सभ्यता)

इस वर्ग में वे सभ्यताएं आती हैं जो अपने गृह की सम्पूर्ण ऊर्जा का उपयोग करने में सक्षम हो। ऐसी सभ्यताएं अपने गृह पर आने वाले अपने तारे के सम्पूर्ण प्रकाश ऊर्जा का प्रयोग बड़ी आसानी से कर सकती हैं । ऐसी सभ्यताएं भूकम्प जैसी प्रकृति आपदाओं को नियंत्रित कर सकती हैं। तथा सागर के अंदर या बाहर अपनी कॉलोनी बसा सकते हैं। हमारी सभ्यता अभी टाइप-1 की सभ्यता की लिस्ट में भी नहीं आती है। खगोल शास्त्रियों के अनुसार हमारी सभ्यता को टाइप-1 बनने में अभी लगभग 100 से 200 साल का समय लग सकता है । हमारी सभ्यता इस टाइप की सभ्यता के स्केल पर 0.72 के समीप है।

टाइप-2(स्टेलर सभ्यता)

इस वर्ग में वे सभ्यताएं आतीं हैं जो अपने तारे की संपूर्ण ऊर्जा को प्रयोग में लाने में सक्षम हों। यदि हम भविष्य में अपने तारे सूर्य की सम्पूर्ण ऊर्जा का प्रयोग करने में सक्षम रहे तो हम टाइप-2 सभ्यता की लिस्ट में आ जायेंगे। इसी अंतर के कारण ये सभ्यता टाइप-1 सभ्यता से 10 अरब गुना ज्यादा शक्तिशाली होती है। ये सभ्यता अमर मानी जाती है जिसके लिए विज्ञान के सभी रहस्य खुल चुके होंगे। मानव सभ्यता को अपने तारे सूर्य की सम्पूर्ण ऊर्जा का उपयोग करने के लिए सूर्य के चारो ओर एक मेगा स्ट्रक्चर बनाना पड़ेगा जिसे डायसनस्फेयर कहते हैं जो कि सूर्य के अति निकट बनाता जाएगा जो सूर्य की सम्पूर्ण ऊर्जा को हमारी पृथ्वी पर भेज सके। इस सभ्यता को किसी उल्का , धूम्रकेतु , या सुपरनोवा का डर नहीं होता है। यदि इस सभ्यता का तारा नष्ट होने की कगार पर हो तो ये सभ्यता अन्य ग्रह पर जाकर बस सकती है या अपने ही ग्रह को अन्य तारे के पास ले जा सकती है। इस तरह की सभ्यता बनने में हमें अभी 100 से 10000 साल तक का समय लग सकता है।

टाइप-3(गैलेक्टिक सभ्यता)

इस वर्ग में वे सभ्यताएं आतीं हैं जो अपनी गैलेक्सी की सम्पूर्ण ऊर्जा का उपयोग करने में सक्षम हो। यह सभ्यता टाइप-2 सभ्यता से भी 10 अरब गुना ज्यादा शक्तिशाली होगी। यह सभ्यता अरबों ग्रहों पर अपना निवास कर सकती है। तथा ब्लैक होल की ऊर्जा का उपयोग करने में भी सक्षम होगी। यह सभ्यता एक गैलेक्सी से दूसरी गैलेक्सी तक आसानी से आ जा सकती है। हमें इस मुकाम तक पहुँचने में अभी 1 लाख से 10 लाख वर्षों तक का समय लग सकता है।

टाइप-4(सुपर गैलेक्टिक सभ्यता)

इस वर्ग में वे सभ्यताएं आती हैं जो पूरे ब्रह्माण्ड की ऊर्जा का प्रयोग करने में सक्षम होतीं हैं। इस सभ्यता के पूरे ब्रह्माण्ड में अलग-अलग जगहों पर डायसनस्फेर बने होंगे जो ऊर्जा को इनके ग्रह पर स्थानांतरित करेंगे। यह सभ्यता वार्प ड्राइव तथा वार्म होल जैसी तकनीकी का उपयोग करने में सक्षम होगी। यह सभ्यता space तथा time को अच्छे से समझ चुकी होगी तथा अमर बन चुकी होगी।

टाइप-5( स्प्रिचुअल सभ्यता)

इस वर्ग में वे सभ्यताएं आएगीं जो आध्यात्मिक होंगी तथा सभी multivarse को अपने काम में लेने में सक्षम होगी। इस प्रकार की सभ्यताओं के आगे हमारा ज्ञान बिल्कुल शून्य हो जाता है ऐसी सभ्यताएं time और स्पेस की समझ से परे होंगी जो कुछ सेकेंड में किसी भी ब्रह्माण्ड को बनाने  तथा नष्ट करने में सक्षम होगी। इस सभ्यता के लोग समानान्तर ब्रह्माण्ड में भी आ जा सकते हैं। ये सभ्यताएं इतनी विकसित होतीं हैं जिनके बारे में हम कल्पना भी नहीं कर सकते।

यूएफओ देखे जाने की घटनाएं

एलियन की मौजूदगी को लेकर हमेशा से प्रश्न उठते रहे हैं परन्तु समय – समय पर कुछ ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं जिनसे एलियंस की मौजूदगी का एहसास होता है विश्व में यूएफओ देखे जाने की घटनाएं भी इनमें से एक है जिनसे एलियंस के अस्तित्व को बल मिलता है इन्हीं घटनाओं में से कुछ प्रमुख घटनाओं को वर्णित किया गया है।

1. ईरान यूएफओ घटना

यह घटना ईरान के एक शहर तहरान की है, 19 सितम्बर सन् 1976 में ईरान की एयर फोर्स को तहरान के आसमान में संदिग्ध विमान उड़ने कि सूचना मिली। ईरान एयरफोर्स ने अपने दो इफ-4 फैंटम जेट्स को इस विमान की छानबीन के लिए रवाना किया। इसके बाद उन जेट्स के पायलटों ने उन्हें देखने की बात कंट्रोल रूम में कही और बताया कि वे जैसे ही उस उड़नतश्तरी के पास जाने की कोशिश कर रहे हैं उनके विमानों के कन्ट्रोल सिस्टम फेल हो जाते हैं। इसके बाद जब एयरफोर्स के जेट्स ने उस उड़नतश्तरी का पीछा किया तो उस उड़नतश्तरी ने किसी मैटेरियल से हमला किया जिससे सफेद रोशनी फेल गई और जेट्स का कम्युनिकेशन खराब हो गया और इतने में उड़नतश्तरी गायब हो गईं। इसके बाद इस मिशन को यही रोक दिया गया।

2. मैकमिन्विले यूएफओ घटना

यह घटना कनाडा शहर की है, इस शहर के रहने वाले अल्विन् और पॉल ट्रेंट ने आकाश में उड़नतश्तरी को उड़ते हुए देखा, जो दिखने में सिल्वर रंग तश्तरीनुमा आकार की थी। दोनों भाइयों ने यूएफओ बताए जाने वाले इस अननॉन ऑब्जेक्ट की तस्वीर ली। जब ये बात लोकल मीडिया में पहुंची तो इन तस्वीरों की जांच की गई , कही ये तस्वीरें फेज तो नहीं, परंतु जांच में पाया गया कि ये तस्वरें रियल है। बात को दबाने के लिए लोकल मीडिया ने अल्विन् और पॉल ट्रेंट को झूठा बताते हुए इनका मजाक उड़ाया , परंतु दोनों मरते दम तक यही बात कहते रहे कि उन्होंने यूएफओ को देखा था।

3. चेन्नई और लद्दाख यूएफओ घटना

चेन्नई के कुछ लोगों ने 20 जून, सन 2013 को रात्रि में एक चमकदार चीज दक्षिण से उत्तर की ओर जाती हुई देखी। यह खबर वहां के लोकल अख़बार में भी छपी थी। इसके बाद 4 अगस्त , सन 2013 को भारतीय सेना के जवानों ने लद्दाख के आसमान में अज्ञात चीजों को उड़ते देखा , बताया जाता है कि उन सात महीनों में अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर भारतीय सेना ने लगभग 100 यूएफओ मूवमेंट्स देखें।

4. कोलकाता यूएफओ घटना

पूर्वी कोलकाता के आसमान में 2 अक्टूबर, सन 2008 में दोपहर 3.30 से शाम 6.30 के बीच एक उड़न तश्तरी उड़ती नजर आई , इसका वीडियो एक हैंडीकैम से बनाया गया। इस यूएफओ से अनेक रंगों की रोशनी निकल रही थीं। लोगो में इसे देखा और यूएफओ की एक झलक पाने के लिए E.M. बायपास पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। एक न्यूज चैनल पर यूएफओ के फुटेज भी जारी किए गए थे।

5. यरूसलम यूएफओ घटना

सन 2011 में यरूसलम के डोम ऑफ रॉक के ऊपर एक चमकीली चीज दिखाई दी , जो बाद में तेजी से ऊपर जाती दिखाई दी और गायब हो गई। इजरायल के टीवी स्टेशन की ओर से कहा गया की ये एक धोखे जैसा था जो दिखा और अचानक गायब हो गया ।

एलियन द्वारा अपहरण कि घटनाएं

यूएफओ देखे जाने की अनेकों घटनाएं सामने आती रहती है जिससे पता लगता है कि एलियंस हमारे ग्रह पर आते रहते हैं पर वो क्यों आते हैं इसका जवाब आपको इन अपहरण की घटनाओं में मिलेगा।

1.बार्नी और बेट्टी हिल के अपहरण की घटना

19 सितम्बर , सन 1961 में दो दंपती बार्नी और बेट्टी हिल कनाडा से छुट्टियां बिताकर अपने घर न्यू हेम शहर जा रहे थे रात्रि का समय था, बार्ने कार चला रहे थे कि तभी उन्होंने आसमान में एक सफेद रोशनी देखी , बार्ने ने गाड़ी रोकी और अपनी दूरबीन से उस रोशनी को देखने लगे , देखते – देखते वो रोशनी पास आने लगी और अब उसका आकार भी दिखने लगा , वह दिखने में तश्तरी नुमा थी ,जिसमें खिड़कियां भी थीं जिनमें कुछ जीव नजर आ रहे थे। बार्ने तुरन्त अपनी गाड़ी में बैठे और घर की ओर रवाना हुए। घर पहुंचकर उन्होंने नोटिस किया कि उन्हें घर तक पहुंचने में कई घंटे बीत गए जबकि उनका घर इतनी दूर नहीं था न ही उन्हें इतने समय का पता चला। इस बात को नजर अंदाज करके दोनों सोने चले गए , परंतु बेट्टी हिल को अजीब जीवों के सपने आने लगे, बार्ने को भी रीड की हड्डी में दर्द होने लगा। इसीलिए दोनों ने सोचा कि उन्हें हेल्प की जरूरत है अत: दोनों पोस्टन के एक मशहूर साइकेट्रिक से मिले , और जब उन्हें सम्मोहन प्रक्रिया से गुजरा गया तो दोनों ने बताया कि उनका कुछ जीवों ने अपहरण कर लिया था जिनके सिर पर बाल नहीं थे और उनका रंग हरा ,हाइट 5 फीट और सिर बड़े थे। उन्होंने बताया कि उनके बालों और नाखूनों के नमूने लिए गए और बेट्टी ने बताया कि उनकी बॉडी में सुई से भी परीक्षण किया गया है। बेट्टी हिल ने एक स्टार सिस्टम ड्रा किया और बताया कि ये उन्हें एलियंस ने दिखाया था जो अंतरिक्ष में मौजूद है। इसके कुछ सालो बाद इसी स्टार सिस्टम को अंतरिक्ष में खोज लिया गया , जिसे बिट्टी हिल पहले ही ड्रा कर चुकी थीं। इस घटना को कई साल बीत गए परंतु आज तक कोई साबित नहीं कर पाया की ये घटना झूठी थीं।

2. ड्राविस बोल्टन के अपहरण कि घटना

सन 1975 में ड्राविस बोल्टन के 6 मित्रो ने ड्राविस बोल्टन के गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई ,जो एरिजोना के पास के एक जंगल में ड्राविस बोल्टन के साथ काम करते थे। उन्होंने बताया कि ड्राविस बोल्टन एक लाइट बीम कि चपेट में आ गया था ,जो कि एक उड़न तश्तरी से निकल रही थी। वो तश्तरी उन्हें घने पेड़ों के पीछे से नजर आ रही थी और इसके बाद ड्राविस गायब हो गया। पुलिस वालो को लगा कि ड्राविस के मित्र झूठ बोल रहे हैं इन्हीं लोगो ने ड्राविस को मारकर कही फेक दिया है इसके बाद ड्राविस के मित्रों का लाइट डिटेक्टर टेस्ट किया गया जिसे सभी ने पास कर लिया। कुछ दिनों बाद ड्राविस वापस लौट आया और उसने बताया कि वह एलियन के विमान में था जहां उसने तीन एलियन देखे जिन्होंने उसे फिर धरती पर छोड़ दिया। पहले ये माना जा रहा था कि एलियंस ने ड्राविस का अपहरण किया था परंतु यूएफओ रिसर्चर जे. पी. रॉबिंसन ने पूरे मामले की जांच की और बताया कि एलियंस ने ड्राविस का अपहरण नहीं किया था बल्कि ड्राविस की जान बचाई थी, रॉबिंसन के अनुसार जब यूएफओ टेक ऑफ करने वाला था तभी ड्राविस उसकी लाइट बीम कि चपेट में आ गया , जिस कारण एलियंस ने उसे अपने यूएफओ में लेजाकर ट्रीटमेंट किया और पुन: ठीक हो जाने पर वापस छोड़ दिया।

3. फ्रेडरिक के अपहरण कि घटना

21 अक्टूबर, सन 1978 को 20 वर्षीय आस्ट्रेलियन पायलट फ्रेडरिक ने सिसना-182 विमान से अपनी नियमित उड़ान भरी, फ्रेडरिक एक अनुभवी कुशल पायलट था जिसे चौथे श्रेणी की इंस्ट्रूमेंट रेटिंग मिल चुकी थी जिससे वह रात में भी उड़ान भर सकता था। उस शाम फ्रेडरिक ने मेलबर्न से किंग आयलैंड के लिए उड़ान भरी, शाम को लगभग 7 बजे उसने मेलबर्न एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम में बात कि और अधिकारियों को बताया कि उससे लगभग साढ़े चार हजार फीट की दूरी पर उसे एक विमान जैसी चीज उड़ती दिखाई दे रही है, कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने कहा परंतु रडार पर तो ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है फ्रेडरिक ने बताया कि वह स्पष्ट देख सकता है कि वह विमान बहुत तेज प्रकाश छोड़ रहा है, इसके बाद कंट्रोल रूम में शांति छा गई , थोड़ी देर बाद फ्रेडरिक ने फिर कॉन्टैक्ट किया और बताया कि वह विमान शायद उसका पीछा कर रहा है , कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने उस विमान का हुलिया पूछा , तब फ्रेडरिक ने बताया कि ये तो वह भी नहीं समझ पा रहा है कि यह किस प्रकार का विमान है मैंने ऐसा विमान कभी नहीं देखा , इसमें से तीव्र प्रकाश निकल रहा है और ये किसी अलग ही मैटेरियल का बना लग रहा है इसके बाद कनेक्शन टूट गया और कुछ देर बाद फ्रेडरिक ने फिर कॉन्टैक्ट किया इस बार फ्रेडरिक की आवाज में डर अलग समझ में आ रहा था, फ्रेडरिक ने बताया कि अब वो विमान उसके विमान के ऊपर है इसके बाद कंट्रोल टूटने लगा और फ्रेडरिक के अंतिम शब्द जो कंट्रोल रूम में सुने गए थे कि ये कोई विमान नहीं है इसके बाद बहुत सर्च ऑपरेशन चला परंतु फ्रेडरिक और उसके विमान का कोई पता नहीं चला, यूएफओ एक्सपर्ट मानते हैं कि वो विमान यूएफओ था और वो फ्रेडरिक को उसके विमान के साथ अपहरण कर ले गए।

4. चार दोस्तों के अपहरण की घटना

यह घटना न्यू इंग्लैंड के एक छोटे कस्बे एलगास की है , सन 1976 में चार दोस्त एलगास नदी के किनारे कैंपिंग के लिए गए , इन लोगों का पहला दिन तो सामान्य रूप से गुजरा अगली रात इन लोगों ने अपने कैंप से कुछ ही दूरी पर आसमान में एक ऑब्जेक्ट से निकलती हुए रोशनी को देखा , और सोचा शायद ये कोई हेलीकॉप्टर या सेना का विमान होगा। और वो लोग सो गए। 20 अगस्त को ये चारो ईगलेलेख के किनारे मछलियां पकड़ने गए , अपने कैंप के पास इन्होंने बड़ा ईंधन का डेर जमा कर आग लगाई ताकि वे उसमें अपना खाना पका सके, उन लोगों के हिसाब से ये आग अब कुछ देर तक जलने वाली थी। कुछ देर बाद उनमें से रेक नाम के व्यक्ति को आसमान में उसी रोशनी को फिर से देखा , और सब को बताया । सब उस रोशनी को देख रहे थे और वो रोशनी उनके करीब आती जा रही थी और देखते- देखते वो ऑब्जेक्ट उनके ऊपर आ गया और उसमें से रोशनी निकली जो उन चारों लोगो पर पड़ी और वो लोग उस ऑब्जेक्ट में पहुंच गए। इसके बाद उन लोगों ने खुद को झील के किनारे पाया और आसमान में उस ऑब्जेक्ट को जाते हुए देखा। उन्होंने एक अजीब बात नोटिस की जो आग वो कुछ देर पहले जला गए थे वो अब राख बन चुकी थी , जबकि उनके हिसाब से ये आग अभी जलनी चाहिए थी। जब ये लोग घर गए तो उन्हें एक जैसे अजीब जीवों के सपने आने लगे , लोगो ने सोचा शायद ये लोग झूठ बोल रहे हैं, इन लोगो का जब लाईट डिटेक्टर टेस्ट किया गया तो ये उसमें पास हो गए। जब इन्हें सम्मोहित कर उस घटना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अजीब से दिखने वाले उस ऑब्जेक्ट में उनका परीक्षण किया गया और इसके बाद वापस झील किनारे छोड़ दिया गया। यूएफओ एक्सपर्ट्स इसे एलियन द्वारा अपहरण की घटना मानते हैं।

5.गॉडफ्रे की अपहरण की घटना

यह घटना इंग्लैंड की है जहां एक पुलिस ऑफिसर गॉडफ्रे ने अपने नियमित गस्त के दौरान आसमान में एक उड़नतश्तरी को देखा, वह उड़नतश्तरी वहां कुछ देर उड़ती रही और फिर चली गई। गॉडफ्रे को इसके बाद कुछ भी याद नहीं क्योंकि वह बेहोश हो गया था। बाद में सम्मोहन की अवस्था में गॉडफ्रे ने बताया कि उसे उस यान के अंदर ले जाया गया जहां उसके मेडिकल परीक्षण किए गए । गॉडफ्रे के अनुसार ये परीक्षण छोटे- छोटे रोबोट्स ने किए जो बाद में उसे उसके गाड़ी में डाल गए। एलियंस रिसर्च मानते हैं कि वो एक एलियन द्वारा किए गए अपहरण की घटना थी।

यूएफओ क्रैश की घटनाएं

अगर आप सोचते हैं कि एलियन हमारे ग्रह पर आते हैं परीक्षण करते हैं और चले जाते हैं यानी उनके साथ कभी कोई दुर्घटना नहीं होती तो शायद आप गलत हैं दुर्घटनाएं किसी के साथ भी हो सकती हैं, ऐसी ही कुछ एलियन यूएफओ क्रैश की घटनाएं निम्न प्रकार हैं।

1. द रोजवेल यूएफओ क्रैश

       सन 1947 ई. में जार्जिया के शहर रोजवेल के लोगो ने दावा किया की उन्होंने आसमान में उड़नतश्तरी को उड़ते हुये देखा है। उड़नतश्तरी की ये ख़बर पूरे शहर में फैल गयीं, मामले ने तब और जोर पकड़ लिया जब अर्नाल्ड नाम के पॉयलट ने इस बात पर मुहर लगा दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने आसमान में कोई अजीब सी चीज उड़ते हुए देखी है। उस समय UFO के बारे में कोई नहीं जानता था तो अनार्ल्ड ने इसे उड़नतश्तरी (फ्लाईंगऑब्जेक्ट) नाम दिया। इस साल roswell में लगभग 300 उड़नतश्तरियों को देखा गया था।   एक दिन विलियम नाम के किसान ने अपने खेत में किसी उड़नतश्तरी जैसी चीज को गिरते देखा। विलियम जब वहां पहुँचा तो क्रैश हुआ ऑब्जेक्ट अजीब था क्योकि विलियम ने ऐसा कोई ऑब्जेक्ट पहली बार देखा था। इसीलिए विलियम ने गवर्मेंट को ये सूचना दी तथा गवर्मेंट द्वारा वह मलमा हटा लिया गया। तथा अगले दिन ही अखबार में खबर छपी की रोजवेल में एक उड़नतश्तरी क्रैश हुई है। ये खबर पूरी दुनियां में फैल गयीं।अगले ही दिन सरकार ने उसे एक हॉट एयर बलून बताया जो क्रैश हुआ था। सरकार द्वारा बात को दबाने की पूरी कोसिस की गई।इसके बाद उस प्रोजेक्ट से जुड़े लोग जब रिटार्यड हो गए तो उन्होंने बताया कि वो कोई एयर बलून नहीं था। उसमें ऐसे मरेरियल का प्रयोग किया गया था जो पृथ्वी पर पाया ही नहीं जाता। एक इंजीनियर जिसने उस ऑब्जेक्ट पर अंडर गवर्मेंट वर्क किया था बताया कि उसमें कोई इंजन नहीं था मैं अब तक नहीं जान पाया कि वो आखिर चलता कैसे था। लोगो का मानना है कि उस घटना में एक एलियन बॉडी भी मिली थी।

2. द औरोरा यूएफओ क्रैश

17 अप्रैल, सन 1997 को एक उड़नतश्तरी स्मॉल टैक्सेस ऑफ अरोरा में स्तिथ एक पवन चक्की से टकराकर क्रैश हो गई। घटना के तुरन्त बाद वहां के एक लोकल आर्मी ऑफिसर ने उस जगह का मुआयना किया। उस आर्मी ऑफिसर ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस मलवे में एक अजीब प्राणी था जो इस दुनिया का बिल्कुल भी नहीं लग रहा था। और इससे पहले की कोई और उस मलबे का निरीक्षण करता उस एलियन डेड बॉडी को वहीं पास के गांव के एक कब्रिस्तान में दफना दिया गया और उस मलबे को पास के किसी गहरे कुएं में डाल दिया गया। उस एलियन पायलट की बॉडी आज भी उसी कब्रिस्तान में दफन है जिस पर कोई मार्क नहीं है बल्कि जो पत्थर रखा था वो चोरी हो गया अब उस कब्र पर एक नया पत्थर रखा है।

एलियंस से संपर्क किए जाने के प्रयास

वैज्ञानिकों द्वारा ब्रह्माण्ड में उन्नत सभ्यताओं कि खोज के लिए के लिए अनेकों बार प्रयास किए गए। जिनमें कुछ निम्न हैं।

1.Wow सिग्नल का मिलना

एक्स्ट्रा तेरिस्टियल सिविलाइजेशन यानी एलियंस की अन्य ग्रहों पर खोज के लिए USA में एक ऑर्गनाइजेशन कि शुरुवात की गई जिसे नाम दिया गया SETI यानी search for extraterrestrial intelligence ,SETI ऑर्गनाइजेशन एलियन का पता लगाने के लिए अंतरिक्ष में सिग्नल भेजती हैं यदि कहीं कोई उन्नत एलियन सभ्यता होगी तो वो इन सिग्नलों को रिसीव करके , अपना सिग्नल जरूर भेजेगी। 15 अगस्त, सन 1977 को भी रेडियों सिग्नल अंतरिक्ष में भेजे गए परन्तु सुबह 11.16 बजे एस्ट्रोनॉमर डॉक्टर जैरी अहमन ने रेडियो सिग्नल पर कुछ हलचल देखी। जैरी ने देखा कि रेडियो सिग्नल को बहुत पावरफुल सिग्नल मिल रहे थे। जो नॉर्मल रेडियों सिग्नल से बिल्कुल अलग थे , जब जैरी ने सिग्नल की लोकेशन देखी तो वो हैरान हो गए ये सिग्नल धरती से 22 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर से आ रहे थे। ये सिग्नल 37 सेकेण्ड तक रिकॉर्ड किए गए जब इन सिग्नल को कागज पर उतार गया तो अंक और अक्षरों का एक कोड मिला
6UQUJ5 , डॉक्टर जैरी ने जब इस कोड का विश्लषण किया तो वे आश्चर्य चकित रह गए । क्योंकि वर्ड्स को जिस प्रकार कोड किया गया था इसे कोई उन्नत सभ्यता ही कर सकती थी। जैरी ने उस कोड को देखकर कागज पर wow लिख दिया और ये कोड wow कोड के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

2. वायसर विमानों द्वारा संदेश

अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने दो मानव रहित विमानों वायसर-1 और वायसर-2 को अंतरिक्ष में भेजा जिससे अंतरिक्ष की अधिक जानकारी हासिल की जा सके। इन दोनों यानों में एक गोल्डन डिस्क भी रखी गई है जिसमें मानव सभ्यता के कुछ फोटेज , हमारी संस्कृति और टेक्नोलॉजी आदि हैं वैज्ञानिकों का मानना है कि यह गोल्डन डिस्क आने वाले 1 अरब वर्षों तक सुरक्षित रहेगी। यदि वायसर विमान किसी उच्च एलियन सभ्यता तक पहुंच सके तो वे सभ्यताएं इस गोल्डन डिस्क के जरिए जान पाएगी की इस ब्रह्माण्ड के एक ग्रह प्रथ्वी पर मानव सभ्यता मौजूद है और शायद वो हमसे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश करें।

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग की चेतावनी

वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का मानना है कि हम कभी एलियंस को अपने मौजूदगी का संदेश नहीं देना चाहिए। यदि किसी एलियन सभ्यता को हमारा सन्देश मिला और वो हमारे ग्रह पर आए तो ये मानव सभ्यता के लिए बड़ा खतरा हो सकता है क्योंकि वो अनेक प्रकाश वर्षों कि दूरी तय करके हमारे ग्रह पर आयेगे। इस बात से उनकी तकनीकी विकास के अंदाजा लगाया जा सकता है की को कितने विकसित होगे। अगर वो हमारे ग्रह पर आते हैं तो हम उनके लिए कीड़े – मकोड़ों की तरह ही होंगे जिन्हें वो जब चाहे नष्ट कर देगें। हॉकिंग ने आगे कहा जब हम मनुष्यों ने कुछ हज़ारों वर्षों में ही अपने ग्रह के वातावरण को खराब के दिया है तो सोचो को सभ्यताएं जो हमसे लाखों वर्षों पहले ही अस्तित्व में आ चुकी होगी , उन्होंने अपने ग्रह के वातावरण का क्या हाल किया होगा और अब वो एक अनुकूल ग्रह खोज रहे होगे। यदि उन्हें प्रथ्वी अनुकूल लगी और उन्होंने मानव सभ्यता को नष्ट कर अपनी सभ्यता को इस ग्रह पर स्थापित किया तो क्या होगा। हॉकिंग ने एलियन को एक गंभीर खतरा बताया और उनसे बचने की चेतावनी दी।

निष्कर्ष

एलियन/ परग्रही को लेकर लोगों के अलग – अलग मत हैं कुछ लोग एलियन के अस्तित्व पर विश्वास करते हैं तो कुछ नहीं। वैज्ञानिक भी एलियन को लेकर खुलकर कुछ नहीं कहते, परंतु समय – समय पर एलियन के मौजूदगी के सबूत मिलते रहते हैं।

आपके एलियन को लेकर क्या विचार हैं क्या एलियन का कोई अस्तित्व है?, क्या एलियन हमारे ग्रह पर आते हैं?, क्या एलियंस ने लोगों के अपहरण किए ? या ये सब केवल कल्पना मात्र है अपनी राय कॉमेंट में जरूर दें।

Thanks for reading our artical, I hope you will give me another chance to discuss new mystry.

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