आकाशगंगा / galaxy

हैलो! दोस्तों मेरा नाम राघवेन्द्र है और आप पढ़ रहे हैं “Mysterious universe”.

हम सभी जानते हैं कि हमारा ब्रह्मांड अविश्वसनीय और विशाल है। हम सब प्रथ्वी ग्रह पर रहते हैं जो कि हमारे सौर मण्डल का एक ग्रह है जो सूर्य के परिक्रमा करता है। तो क्या हमारा सौर मण्डल स्थिर है ? इसका जवाब है नहीं हमारा सौर मंडल भी हमारी आकाशगंगा milkywey के केंद्र की परिक्रमा करता है।

इन आकाशगंगाओं में हमारे सूर्य जैसे अरबों तारे, और प्रथ्वी जैसे खरबों ग्रह मौजूद होते है तो आइए इस आर्टिकल में आकाशगंगा को विस्तार से समझते हैं।

आकाशगंगा क्या है?

तारा , ग्रह , उपग्रह , क्षुद्र ग्रह , तथा धूम्रकेतु आदि मिलकर सौर मंडल का निर्माण करते हैं  जिसमें उपग्रह, ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण अपने – अपने ग्रहों  की परिक्रमा करते हैं तथा ग्रह , क्षुद्र ग्रह तथा अन्य पिण्ड तारे के तीव्र गुरुत्वाकर्षण बल के कारण तारे की परिक्रमा करते हैं । इसी प्रकार हर milkyway आकाशगंगा के मध्य में बहुत सघन तथा तीव्र गुरुत्वाकर्षण बल का एक पिंड हैं जिसे सुपर मैसिव ब्लैक होल कहते हैं । सुपर मैसिव ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण बल तीव्र होने के कारण तारे , सभी ग्रहों तथा उपग्रहों सहित अर्थात पूरा सौर मंडल सुपर मैसिव ब्लैक होल की परिक्रमा करते हैं । इसी प्रकार अरबों तारों अर्थात सौर मण्डल ,इंट्रस्टेलर गैस तथा धूल के समूह को गैलेक्सी या आकाशगंगा कहते हैं।

आकाशगंगा के प्रकार (Types of Galaxies)

आकाशगंगा की आकृति के आधार पर इन्हें चार भागों में विभाजित किया गया है।

1. एलिप्टिकल आकाशगंगा (Elliptical Galaxy)

यह आकाशगंगाओ का एक प्रकार है जिसमें प्रायः पुराने तथा कम गुरुत्वाकर्षण के तारे पाये जाते हैं। इनमें पाये जाने वाले तारों की संख्या लाखों में होती है। तारों के अलावा इसमें धूल तथा दूसरे गैस मिश्रित पदार्थ भी पाये जाते हैं। इस प्रकार की आकाशगंगाओ में पाये जाने वाले तारे गांगेय केंद्र (galactic center) की परिक्रमा करते हैं।

2. स्पाइरल आकाशगंगा ( Spiral Galaxy)

ये सर्पिलाकार आकाशगंगाये होती है सर्पिलाकार आकार होने के कारण इनकी भुजायें होतीं हैं जिनमें तारो के समूह केंद्र सुपर मैसिव ब्लैक होल की परिक्रमा करते हैं । सर्पिल आकाशगंगा के भुजाओ में केंद्र की अपेक्षा असंख्य नवजात तारे पाये जाते हैं इन तारों में अधिक चमक होती है इस कारण सर्पिल आकाशगंगा की भुजायें अधिक चमकदार होतीं हैं।

अनियमित आकाशगंगा ( Irregular Galaxy)

इस तरह की संरचना वाली आकाशगंगाओं की दोनों सर्पिल हाथ एक सीधे स्तंभ के दोनों छोर से उद्भव होते दिखाई देते हैं। यही सीधा स्तंभ आकाशगंगा के केंद्र से होकर गुजरता है। अब तक ज्ञात कुल आकाशगंगाओं में लगभग एक प्रतिशत आकाशगंगाएं इसी तरह की संरचना वाली है। इन तीन प्रकार की आकाशगंगाओं के अलावा ब्रह्मांड में लगभग 2 प्रतिशत आकाशगंगाएं अनियमित संरचना वाली हैं। इनका आकार अनियमित है और ये छोटे होते हैं।

4 . ड्वार्फ आकाशगंगा ( Dwarf Galaxy)

बौनी आकाशगंगा उन आकाशगंगाओ को कहते हैं जिनमें केवल कुछ अरब  तारे ही होते हैं  जो कि अन्य प्रकार की आकाशगंगाओ के खरबों तारों की तुलना में काफी कम है । प्रायः ऐसी आकाशगंगाये , अन्य प्रकार की आकाशगंगाओ की परिक्रमा करती हैं । इसलिए इन्हें बड़ी आकाशगंगाओ के उपग्रह के रूप में भी जाना जाता है।

Milkyway आकाशगंगा ( Milkyway galaxy)

हमारा तारा यानी सूर्य तथा पूरा सौर मण्डल Milkyway आकाशगंगा में ही Milkyway आकाशगंगा के केंद्र की परिक्रमा कर रहा है। हमारी आकाशगंगा स्पाइरल आकाशगंगा है जिसका एक बड़ा सा केंद्र है । हमारी आकाशगंगा का आकार स्पाइरल होने के कारण इसकी छह भुजायें हैं।

  1. Persues arm 
  2. Norma arm
  3. Outer arm
  4. Scutum-centaurus arm
  5. Carina-sagittarius arm
  6. Orion-cygnus arm

इनमें से हमारा सौर मण्डल Orion-cygnus arm में गतिमान है।

वैज्ञानिकों के अनुसार हमारी आकाशगंगा लगभग 13.21 अरब वर्ष पुरानी है तथा हमारे ब्रह्माण्ड की प्राचीन आकाशगंगाओ में से एक है। हमारी आकाशगंगा का व्यास लगभग 1 लाख 40 हजार प्रकाश वर्ष है। हमारी आकाशगंगा में लगभग 100 खरब ग्रह तथा 100 से 400 अरब तारे मौजूद हैं। हमारी आकाशगंगा का द्रव्यमान लगभग 15 हजार अरब सौर द्रव्यमान है अर्थात हमारी आकाशगंगा का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान की तुलना में 15 हजार अरब गुना है। हमारी आकाशगंगा लगभग 600 किलोमीटर/सेकेंड के वेग से गतिमान है। हमारी आकाशगंगा के केंद्र में स्थित Sagittarius A star एक सुपर मैसिव ब्लैक होल है। इस ब्लाक होल की दूरी हमारे सौर मण्डल से 26 हजार प्रकाश वर्ष है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस ब्लैक होल का व्यास 4 लाख 40 हजार किलोमीटर है। हमारी आकाशगंगा की लगभग 50 उपग्रह आकाशगंगाये मौजूद हैं जो हमारी आकाशगंगा की परिक्रमा करती रहतीं हैं।

अन्य ज्ञात महत्वपूर्ण आकाशगंगा

हमारे ब्रह्माण्ड में अरबों खरबों की संख्या में आकाशगंगा मौजूद हैं परन्तु हमारे वैज्ञानिक कुछ ही आकाशगंगाओं का पता लगाने में सफल हुए हैं जिनमें से प्रमुख आकाशगंगा निम्न हैं।

1.The SOMBRERO GALAXY

इसे M104 या NGC 4594 के रूप में भी जाना जाता है। इसमें एक उज्ज्वल केंद्रीय नाभिक और एक बड़ा केंद्रीय उभार है। इसके अलावा, एक धूल की रेखा एक झुकी हुई डिस्क के आकार में देखी जा सकती है। इसका स्पष्ट परिमाण +9.0 है जिसका अर्थ है कि इसे आसानी से एक साधारण दूरबीन से देखा जा सकता है। डार्क डस्ट लेन और एक बड़ा केंद्रीय उभार मिलकर इसे एक सोम्ब्रेरो का आकार देते हैं। यह ब्रह्मांड में सुंदर आकाशगंगाओं में से एक है जो इसे सभी खगोलविदों के लिए एक आकर्षण बनाता है।

खगोलविदों के अनुसार, यह आकाशगंगाओं की एक स्ट्रिंग के बजाय एक औपचारिक आकाशगंगा नहीं है जो वर्गो क्लस्टर से दूर फैली हुई है। यहां लगभग 2,000 गोलाकार क्लस्टर झुंड हैं जो इस आकाशगंगा के केंद्र में देखे जा सकते हैं। एक स्पष्ट आकाश के दौरान, दूरबीन के माध्यम से सोम्ब्रेरो गैलेक्सी को आसानी से देखा जा सकता है और इसलिए धूल वाली गली के साथ एक बड़ी दूरबीन का उपयोग किया जाता है IT को मेसजर 104, M104, और NGC 4594 के रूप में भी जाना जाता है।

2. THE BLACK EYE GALAXY (M64)

इसे “स्लीपिंग ब्यूटी गैलेक्सी” के रूप में भी जाना जाता है। इसके बीच में लाल रंग हाइड्रोजन को प्रदर्शित करता है जिसका सीधा अर्थ है कि बहुत बड़ी संख्या में बड़ी संख्या में तारे बन रहे हैं। इस आकाशगंगा का सबसे अजीब हिस्सा यह है कि आकाशगंगा का भीतरी भाग एक दिशा में घूमता है। हालांकि, तारे और धूल जो 40,000 प्रकाश वर्ष में फैले हैं, वे दूसरी दिशा में घूमते हैं। यह पृथ्वी से 17 मिलियन प्रकाश वर्ष पर है।

अद्भुत आकाशगंगाओं में से इस आकाशगंगा को विभिन्न नामों से जाना जा सकता है जैसे कि ईविल आई गैलेक्सी, स्लीपिंग ब्यूटी गैलेक्सी, मेसियर 64 (या एम 64), पीकेएस 1254 + 21, यूजीसी 8 और एनजीसी 4826। यह आकाशगंगा हमारी प्रथ्वी से 24 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर कोमा बर्नीस नामक तारामंडल में स्थित है। तीन लोगों ने आकाशगंगा को खोजा और उनके नाम एडवर्ड पिगोट, जो वर्ष 1779 में एक अंग्रेजी खगोलशास्त्रीग रहे, अगलेक जोहान एलर्ट बोडे, उसी वर्ष 1779 में एक जर्मन खगोलशास्त्री और अंतिम एक मार्च 1780 में चार्ल्स मेसियर हैं और ये सब M64 के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।

3. GRAND SPIRAL GALAXY

यह ब्रह्माण्ड में मौजूद सबसे सुंदर आकाशगंगाओं में से एक है। इसकी सर्पिल भुजाएं कई रेडियन में आकाशगंगा के चारों ओर फैली हुई हैं और यह आकाशगंगा की त्रिज्या के आसपास स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। 2002 तक, वर्तमान में ज्ञात सर्पिल आकाशगंगाओं के लगभग 10 प्रतिशत को भव्य डिजाइन प्रकार के सर्पिल के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसे NGC 123 के नाम से भी जाना जाता है।

सुंदर आकाशगंगा लाखों सितारों और केंद्र के चारों ओर घूमने वाले गुरुत्वाकर्षण बल से बंधी हुई धूल से मोहित है। सर्पिल या भंवर आकार की आकाशगंगा में भुजाएं, लहरों के रूप में दिखाई देती हैं। नवगठित और यहां तक ​​कि बड़े सितारों पर चमकीले धब्बे देखे जा सकते हैं। सर्पिल आकाशगंगाओं को डिस्क आकाशगंगाओं के रूप में भी जाना जाता है और एक उभड़ा केंद्र होता है जिसे उभार कहा जाता है।

4. GALAXY NGC 3370

यह सुंदर और धूल भरी आकाशगंगाओं में से एक है जो लगभग 98 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर सिंह तारामंडल की ओर स्थित है। NGC 3370 के सुंदर दृश्य को हबल स्पेस टेलीस्कोप ने सर्वेक्षण के लिए उन्नत कैमरे का उपयोग करके कैप्चर किया है। साथ ही, यह आकाशगंगा में अलग-अलग सेफिड वैरियाबल स्टार्स की पहचान करने के लिए काफी तेज है। आप सोच रहे होंगे कि सेफिड वैरिएबल की भूमिका क्या है? सेफिड वैरियाबल स्टार्स का उपयोग एक्स्ट्रागलैक्टिक दूरियों को स्थापित करने के लिए किया जाता है।

5. GALAXY NGC 1512

यह शौकिया दूरबीनों के साथ स्पष्ट दिखाई देता है। यह आकाशगंग 70,000 प्रकाश वर्ष में फैली है, जो लगभग हमारे मिल्की वे गैलेक्सी जितनी बड़ी है। यह पृथ्वी से 38 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर तारामंडल होरोलियम में स्थित है। आकाशगंगा में एक सुंदर डबल रिंग संरचना है। एक वलय गैलेक्टिक नाभिक के चारों ओर और दूसरा मुख्य डिस्क में है। इसे डोरैडो समूह के सदस्य के रूप में भी सूचीबद्ध किया गया है।

निष्कर्ष

आकाशगंगा इतनी विशाल होती हैं जिनमें हमारे तारे सूर्य की तरह अरबों तारे , खरबों ग्रह और गैसों और डस्ट के विशाल बादल मौजूद होते हैं। हमारी आकाशगंगा milkeyway में ही 100 अरब से अधिक तारे हैं तो इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में कितने होगे ?, हमें तो ये भी नहीं पता कि हमारा ब्रह्माण्ड कितना विशाल है।

अगर आपके मन आकाशगंगा को लेकर कोई प्रश्न अब भी हो तो कॉमेंट में जरूर पूछें।

Thanks for reading our artical, I hope you will give me another chance to discuss new mystry.

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